The Global Voices Lingua project hopes to bring GV content to new linguistic audiences - Details

Also in:

देश:
Egypt
विषय:
Racism, Religion, Software & Tools, Entertainment
भाषाएं:
English

 

हाल ही में मुसलिम मैसाकर नाम का एक वीडियो गेम जारी किया गया है जिसमें खिलाड़ी नाना प्रकार के हथियारों का उपयोग करते हुए चाहे जितने मुसलमानों को मार सकता है जिसमें सर्वशक्तिमान अल्लाह भी शामिल है. जाहिर है, मिस्री चिट्ठाकारों ने त्वरित प्रतिक्रियाएँ दी हैं.

जेनोबिया चेतावनी दे रहे हैं कि युवा पीढ़ी हिंसा को कुछ इस कदर अपना रही है कि वो दूसरे धर्मावलंबियों का नामोनिशान मिटा देने के काल्पनिक खेल में भी मजा ले रही है:

मैं इस बात से इंकार नहीं कर सकता कि मैं बहुत ही परेशान हूं, आंदोलित हूं. क्योंकि इन खेलों को अंततः युवा पीढ़ी ही खेलेगी, और इस खेल के जरिए उनके जेहन में दूसरे धर्मों के प्रति इस कदर तक कड़वाहट भर दी जाएगी कि वे इस दुनिया में उनका नामोनिशान मिटाने के लिए खुलेआम कत्लेआम करने लगेंगे. हिंसा फैलाने का यह खूनी खेल का तरीका,  हिंसा की संस्कृति को फैलाने के दूसरे पारंपरिक, खतरनाक तरीकों से कतई भिन्न नहीं है. आमतौर पर वीडियो खेल दिनों दिन खतरनाक होते जा रहे हैं- ग्रांड थैप्ट ऑटो ने उत्तरी अमरीका से लेकर एशिया तक अपराधों की वृद्धि में उत्प्रेरक का काम किया है.

कुछ इसी तरह के विचार तारेक के भी हैं:

यहाँ सवाल वीडियो गेम का नहीं है. सवाल है कि यह खेल आगे जाने कितने चैन रिएक्शनों को पैदा करेगा. मीडिया ने, कुछ हालिया परिस्थितियों ने और कुछ धार्मिक अतिवादियों के कृत्यों ने आम जनता के दिल में  मुसलिम रूढ़िवादियों के प्रति घृणा घर कर रख दी है. और फिर  डेनिश कार्टूनिस्ट और इस वीडियो गेम के सृजक जैसे लोग इस घृणा को मीडिया तथा अपने आसपास के लोगों के जरिए भुनाने के प्रयास कर रहे हैं. और मुझे नहीं लगता कि इस तरह का यह अंतहीन पाश कभी समाप्त भी होगा. हालांकि कुछ यथोचित समाचार पत्रों तथा टीवी चैनलों ने इस तरह की बातों पर लगाम कसने के लिए कुछ प्रयास हाल ही में किए हैं. परंतु फिर भी,  ये तो उस जिन्न की तरह हो गया है जिसे आप एक बार बोतल से बाहर तो निकाल लेते हैं, परंतु उसे फिर किसी सूरत बोतल में वापस नहीं डाल सकते.


2 टिप्पणियाँ

  • यह उपभोक्तावाद के नासूर की रिसाव की एक झलक मात्र है, मित्र! जो भी बिक जाय.. बेच लो । पैसा आने दो, बस… डोन्ट डिस्टर्ब मी! यह तो वर्चुअल गेम है, एके 47 या मानव सभ्यता विनाश के अन्य औज़ार बेचने वाले तो जानते ही हैं… इसका उपयोग कहाँ होना है, किंतु यह उनके लिये आय अर्जित करने का एक साधन मात्र है , वह तो अपने को निमित्त भर मान कर अपना कर्तव्य कर रहें हैं। सरकारें ? वह तो तब तक झपकी लेती रहेगी, जब तक कोई मुद्दा उनको
    न चुटकियाता है।

  • यह एक खतरनाक खेल है.

    नाजीओं के सफाए को लेकर बहुत से खेल बने है, यह भी उसी तर्ज पर बना लगता है, मगर इसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे.

बातचीत में शामिल हों

लेखक, कृपया सत्रारंभ »

निर्देश

  • कृपया दूसरों का सम्मान करें. द्वेषपूर्ण, अश्लील व व्यक्तिगत आघात करने वाली टिप्पणियाँ स्वीकार्य नहीं हैं।.