2008-07-11
2007-09-14
भारत: रामायण के राम
वर्णम हालिया सेतुसमुद्रम विवाद पर लिखते हैं कि राम वाकई थे कि नहीं ये पता करने के केवल पुरात्तविक प्रमाण ही देने के प्रयास में एएसआई ने इतिहासकारों को नकार दिया।
2007-08-24
मेडागास्कर: बूंद बूंद से सागर
बूंद बूंद से सागर बनता है: "एक गाँव के चार अफ़्रीकी चिट्ठाकारों ने बदलाव लाने हेतु मिलकर एक प्रकल्प शुरु किया है। और वे सिर्फ बातें ही नहीं कर रहे हैं, वाकई काम भी कर रहे हैं।"
2007-08-23
ज़ाम्बिया: दान के पैसे से कार व आईपॉड
ज़ाम्बिया में अधिकाँश लोग कार और आईपॉड चाहते हैं और, पॉज़िटिवली ज़ाम्बियन लिखते हैं, चुंकि दान का पैसा आसानी से उपलब्ध हो जाता है इसलिये वे गरीबी का सामना करने के नाम पर फर्ज़ी संस्थायें बना लेते हैं।
अफ्रीका का पिंड छोड़ो
कम्यूनिस्ट सॉक्स एंड बूट्स हर बच्चे को लैपटॉप (OLPC) की खबर ले रहे हैं, "ये इस गलत अनुमान पर आधारित है कि बच्चे इसे अपने साथ शिकार पर ले जायेंगे या मिट्टी की दीवारों वाली पाठशालाओं में इनका इस्तेमाल करेंगे या कि उन्हें अंग्रेज़ी से स्थानीय भाषाओं में सरल अनुवाद ...
नामीबिया: विकास के डिजीटल उपकरण
जेरार्ड नामीबिया के लर्नलिंक परियोजना के बारे में लिखते हैं,"मैं लर्नलिंक से ही शुरुवात करुंगा, खास तौर पर उनके "नामीबिया" प्रकल्प से"।
2007-08-09
आर्मीनिया: विश्व बैंक ने दिया जवाब
भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रही विश्व बैंक ने अब आर्मीनियाई चिट्ठाकार ओनिक क्रिकोरियन को औपचारिक जवाब भेजा है। हालांकि ओनिक मानते हैं कि अगर वो कुछ छुपा नहीं रही है तो उसे आधिकारिक रूप से कारणों की खुली छानबीन शुरु करनी चाहिये।
नाईजीरिया: अश्वेत महाशक्ति?
ये बात तो सर्वज्ञात है कि नाईजीरिया अफ्रीका में सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है और दक्षिण अफ्रीका में सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति भी। ये भी काफी हद तक व्यापक तथ्य है कि नाईजीरिया की सेना क्षेत्र के सामरिक महत्व के इलाकों में हस्तक्षेप कर रही है। पर जो तथ्य ज्यादातर ...
2007-08-08
ट्रिनिडाड व टोबैगो: तकनीक का फंदा?
नोप्रोज़ ने हमारे जीवन पर तकनलाजी के प्रभाव पर कई सवाल उठाये हैं पर ये भी कहते हैं, "एक चीज तो पूर्णतः स्पष्ट है, हम एक बार में केवल एक ही काम कर सकते हैं"।
जमैका: 45 साल बाद
जमैका ने हाल ही में अपनी आज़ादी की 45वीं वर्षगाँठ मनाई। डेनिस जोन्स इस देश की प्रगति का जायजा ले रहे हैं।






जापान : 'खाद्यान...
- अधिकांश अंतर्राष्ट्रीय ...
- विश्व क्या सोचता है क्या क...
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