तुर्की लेखक व चिट्ठाकार मुस्तफा अक्योल की आर्मीनियाई जातिसंहार विषय पर आप्रवासी आर्मीनियाई को लिखे खुले पत्र का जवाब “लाईफ इन आर्मीनिया” चिट्ठे के लेखक रफी ने तुर्की नागरिकों को लिखे अपने खुले पत्र से दिया है। 1915 से 1917 के बीच हुई घटनाओं को जातिसंहर का दर्जा देते हुये वे लिखते हैं कि इस बकाया घटना का हमेशा के लिये हल निकालने का यह सही समय है ताकि आर्मीनियाई और तुर्क आगे बढ़ सकें और “अंततः एक दूसरे का साथ शाँतिपूर्वक जीना शुरु कर सकें”।
Latest stories परिचय Disaster
12 August 2008
क्या बांग्लादेश समुद्र में डूबने वाला है?
वातावरण परिवर्तन के दुष्प्रभावों से सर्वाधिक पीड़ित होने वाले राष्ट्रों में बांग्लादेश का नाम सबसे पहले आता है. नदी के डेल्टा में स्थित होने के कारण वैश्वीय ऊष्मीकरण से समुद्री...
5 June 2008
इक्वाडोर : अमेजन के आदिवासी और तेल का खेल
अमेजन की एक सुबह… – मार्कजी6 द्वारा क्रिएटिव कॉमन्स एट्रीब्यूशन्स के तहत प्रयोग में लिया गया अमेजन के जंगलों में लोगों की दिलचस्पी अचानक ही फिर से जागृत हो गई...
28 May 2008
यूट्यूब ने नागरिक पत्रकार चैनल प्रारंभ किया
नागरिक पत्रकारों के हर किस्म के वीडियो को अब अत्यंत आसानी से ज्यादा से ज्यादा एयर टाइम मिलने वाले हैं. यूट्यूब वीडियो अपलोडिंग जालस्थल ने नागरिक पत्रकारों के लिए सिटिजन-न्यूज...
15 May 2008
भारत: जयपुर बम धमाका, आतंकवाद और सरकार
13 मई को लगातार हुए बम धमाकों ने जयपुर को हिलाकर रख दिया . विविध रपटों के अनुसार, कोई 60 से अधिक लोग मारे गए व 150 से अधिक लोग...
3 November 2007
27 August 2007
यूनान में दावानल
आपने संभवतः ये खबर सुन ली होगीः यूनान (ग्रीस) जल रहा है। आज दावानल प्राचीन नगर ओलंपिया तक जा पहुंचा जो ओलम्पिक्स की जन्मभूमी है। साथ ही यहाँ यूनान की...
24 August 2007

जमैका: तूफानी डीन के बाद
जमैका में डीन नामक अंधड़ से बचने के बाद सिटीगर्ल लिखती हैं, “दरअसल बड़ी नाइंसाफी लगती है बिजली के 4 दिनों के कष्टकर इंतज़ार के बारे में शिकायत करना सिर्फ इसलिये कि मुझे टीवी देखना और अंतर्जाल सर्फिंग करनी है। आखिरकार, ऐसे लोग भी हैं जो इस तूफान से किसी तरह बचे हैं और उन्हें रहने का ठिकाना तक मयस्सर नहीं।”
21 August 2007

बाहरीन: आतंवादियों का आयात
बाहरीनी चिट्ठाकार ईमूड्ज़ हैरत जताते हैं कि कैसे एक कथित आतंकवादी का, सउदी अरब में आतंकवाद के पूर्व मामले दर्ज होने के बावजूद, बाहरीन में स्वागत किया गया।





























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देबू भाई कुछ दिनों से मन में एक विचार चल रहा था, लोरियों को जमा...