रोपर्ट एमस्टर्डम ब्लॉग लाईवजर्नल को हाल में खरीदने वाली कंपनी एसयूपी के निदेशक से सीएमएस वायर द्वारा लिये साक्षात्कार की निंदा करते हुये लिखता है, “रिपोर्टर ने बड़े नर्म सवाल पूछे और खास मुद्दों पर कोई पूछताछ नहीं की, मसलन अगर सुरक्षा एंजेसियाँ खास चिट्ठाकारों की व्यक्तिगत जानकारी चाहे तो एसयूपी की नीति क्या होगी।”
Latest stories परिचय International Relations
30 September 2008
पाकिस्तान : जरदारी के फ्लर्ट पर चिट्ठाकारों का रिएक्शन
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी हाल ही में न्यूयॉर्क में अमरीका की उप-राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार सारा पालिन से जब मिले तो उन्होंने बातचीत के दौरान सारा से फ्लर्ट...
11 July 2008
जापान : ‘खाद्यान्न संकट पर प्रीतिभोज’ और ‘स्काइप पर जी8′
टोकियो, होक्काइदो में त्रिदिवसीय जी8 सम्मेलन [जा.] 9 जुलाई को सम्पन्न हो गया. कई चिट्ठाकारों के अनुसार, यह सम्मेलन एक तरह से उनके मुँह का स्वाद कड़वा कर गया. इस...
22 May 2008
इस सप्ताह की चिट्ठाकारा : जिलियन यॉर्क
सप्ताह के चिट्ठाकार में आज मोरक्को की लेखिका जिलियन सी यॉर्क से बातें करते हैं जो कि वाइसेज विदाउट वोट्स में भी नियमित लिखती रही हैं. मेकेन्स, मोरक्को में दो...
7 April 2008
भारत : ओलंपिक मशाल और तिब्बत
लगता है लोगों के दिलो-दिमाग से तिब्बत का निकल पाना मुश्किल है. भारत की आभासी दुनिया में इसे न सिर्फ जनता का जबर्दस्त समर्थन हासिल हो रहा है, बल्कि तिब्बत...
7 December 2007
5 December 2007
स्लोवेनियाः जिसे अक्सर भुला दिया जाता है
“अगले 28 दिनों में स्लोवेनिया को अगले 6 महीनों के लिये यूरोपियन यूनियन के राष्ट्रपति की जिम्मेवारी मिलने वाली है और यह पहला ऐसा मौका है क्योंकि स्लोवेनिया कुछ 1300...
रूसः पुतिन को मुसलमानों का साथ
विंडो ओन यूरेशिया रूसी मुसलमानों के वोट डालने के रूख के बारे में लिखते हैं, “Islam.ru के शोध विभाग के प्रमुख अब्दुल्ला रिनात मुखामेतोव के मुताबिक मुसलमानों ने यूनाईटेड रशिया...
24 November 2007

यूक्रेनः प्रदर्शनी का सच?
मॉस्को में होलोडोमोर प्रदर्शनी में कलाविध्वंस (वैंडेलिज़्म) की घटना पर वहाँ के मेयर युरी लुज़कोव ने कहा, “मुझे लगता है कि इस प्रदर्शनी का बस एक ही मकसद थाः रूसी और युक्रेनी लोगों का एका तोड़ना और उनमें दरार पैदा करना।” यूक्रेनियाना इस तर्क को होलोकास्ट के परिपेक्ष्य में भी…
आगे पढ़ें »17 November 2007

मिस्र: क्या इज़्राइल भयभीत है?
“मुझे इस बात का कारण समझ नहीं आता कि इज़्राइल अरब या किसी भी अन्य इस्लामी देश के पास अपना परमाणु कार्यक्रम होने की बात पर इतना खौफ़जदा रहे। मुझे कोई तार्किक कारण नहीं नज़र आता जो इज़्राइली कर रहे हैं चाहे हो इरान के खिलाफ विश्व को बरगलाने की बात हो या मिस्र या KSA की शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम शुरु करने की घोषणा करने पर निंदा हो।”, मिस्र की चिट्ठाकार जेनोबिया लिखती हैं।
3 November 2007

आर्मीनियाः खुला पत्र
तुर्की लेखक व चिट्ठाकार मुस्तफा अक्योल की आर्मीनियाई जातिसंहार विषय पर आप्रवासी आर्मीनियाई को लिखे खुले पत्र का जवाब “लाईफ इन आर्मीनिया” चिट्ठे के लेखक रफी ने तुर्की नागरिकों को लिखे अपने खुले पत्र से दिया है। 1915 से 1917 के बीच हुई घटनाओं को जातिसंहर का दर्जा देते हुये वे लिखते हैं कि इस बकाया घटना का हमेशा के लिये हल निकालने का यह सही समय है ताकि आर्मीनियाई और तुर्क आगे बढ़ सकें और “अंततः एक दूसरे का साथ शाँतिपूर्वक जीना शुरु कर सकें”।





























आरएसएस फीड International Relations 





देबू भाई कुछ दिनों से मन में एक विचार चल रहा था, लोरियों को जमा...