<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Global Voices हिन्दी में &#187; Internet &amp; Telecoms</title>
	<atom:link href="http://hi.globalvoicesonline.org/category/topics/internet-telecoms/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://hi.globalvoicesonline.org</link>
	<description>पृथ्वी बातें कर रही है। क्या आप सुन रहे हैं?</description>
	<lastBuildDate>Tue, 02 Jun 2009 07:15:03 +0000</lastBuildDate>
	<generator>http://wordpress.org/?v=2.8.4</generator>
	<language>en</language>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
			<item>
		<title>आम चुनाव 2009: कुछ तथ्य, कुछ मिथक</title>
		<link>http://hi.globalvoicesonline.org/some-interesting-factoids-and-trivia/</link>
		<comments>http://hi.globalvoicesonline.org/some-interesting-factoids-and-trivia/#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 16 Apr 2009 05:19:17 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Debashish Chakrabarty</dc:creator>
				<category><![CDATA[Elections]]></category>
		<category><![CDATA[Governance]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[Internet & Telecoms]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[Weblog]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://hi.globalvoicesonline.org/?p=228</guid>
		<description><![CDATA[16 अप्रेल 2009 को, भारत में आम चुनाव के पहले दौर की शुरुवात होगी और यह सिलिसिला 13 मई, 2009 तक चलेगा। 1947 में प्राप्त आजादी के बाद यह भारत का 15वां आम चुनाव है। पढ़िये विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के चुनावों के बारे में कुछ रोचक तथ्य।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<em>मूल लेखक/लेखिका<a href="http://globalvoicesonline.org/author/kamla/">कमला भट्ट</a>  &middot; अनुवादक <a href='http://hi.globalvoicesonline.org/author/debashish/'>Debashish Chakrabarty</a> &middot;  <a href='http://globalvoicesonline.org/2009/04/15/some-interesting-factoids-and-trivia/'>मूल प्रविष्टि देखें</a></em> 
<br /><p>आज, यानी 16 अप्रेल 2009 को, भारत में आम चुनाव के पहले दौर की शुरुवात होगी और यह सिलिसिला 13 मई, 2009 तक चलेगा। 1947 में प्राप्त आजादी के बाद यह भारत का 15वां आम चुनाव है।<br />
<strong><br />
10 लाख से ज़्यादा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें</strong></p>
<p>भारत की जनसंख्या में से 71 करोड़ 40 लाख लोग मतदान कर सकते हैं। देश भर में तकरीबन 13 लाख 68 हज़ार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Indian_general_election,_2009" target="_blank">मशीनें तैनात</a> की गई हैं।</p>
<p><strong>मतदान क्षेत्रों का नवीनीकरण</strong></p>
<p>शायद यह पहली बार है जब कुछ राज्यों में जिलों का नवीनीकरण किया गया ताकि उनकी शहरी अबादी को सही प्रतिनिधित्व मिल सके। कर्नाटक, खास तौर में बंगलौर में, इस तरह के मामले हैं जहाँ जिलों के <a href="http://www.livemint.com/2008/04/18000023/With-more-seats-Bangalore-get.html" target="_blank">नवीनीकरण के फलस्वरूप</a> शहरी क्षेत्रों में सीटों की संख्या ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में बढ़ी हैं।</p>
<p><strong>4 करोड़ अधिक मतदाता</strong></p>
<p>भारत की जनसंख्या 100 करोड़ है और 60 प्रतिशत आबादी 35 साल से कम आयुवर्ग की है। इसीलिये सोची समझी नीति के तहत मीडिया के द्वारा इस युवा वर्ग तक पहुंच बनाने की कोशिश राजनीतिक दलों ने की है।  इस बार चुनाव प्रचार और मतदाता जागरण अभियानों में फिल्मी सितारों और फिल्मकारों की भागीदारी भी अधिक रही है। एक मीडिया रपट के मुताबिक 2994 में संपन्न पिछले चुनाव के मुकाबले इन आम चुनावों में 4 करोड़ नये मतदाता जुड़े हैं।</p>
<p><strong>आनलाईन जानकारी की बाढ़</strong></p>
<p>इस बार के आम चुनाव में जो बात स्पष्ट रूप से अलग है वो है विभिन्न मीडिया चैनलों और भाषाओं में वोटरों के लिये उपलब्ध जानकारी की मात्रा। उदाहरण के तौर पर <a href="http://in.elections.yahoo.com/" target="_blank">याहू</a> और <a href="http://www.google.co.in/intl/en/landing/loksabha2009/" target="_blank">गूगल</a> जैसे बड़े संस्थानों ने नक्शों के आकर्षक <em>मैशअप</em>, विडियो, आडियो और जानकारी युक्त खास साईटों का निर्माण किया। मुख्यधारा के मीडिया ने अपने आनलाइन, ब्रॉडकास्ट और प्रिंट संस्करणों के लिये चुनावों पर खास सामग्री का संयोजन किया है। और सर्वव्यापी मोबाईल फ़ोन तो है ही जिसका विभिन्न राजनैतिक दल एसएमएस या वॉयेस संदेश भेजकर चुनाव प्रचार हेतु दोहन कर रहे हैं।</p>
<p><a href="http://eci.nic.in/" target="_blank">चुनाव आयोग</a> ने भी मतदाताओं के लिये अनेक जानकारियाँ अपने जालसथल पर रखी हैं, मतदान के लिये पंजीकरण कैसे करायें से लेकर आम चुनाव में अयोग्य ठहराये गये उम्मीदवारों की सूची तक।</p>
<p><strong>एक हज़ार से अधिक राजनैतिक दल मैदान में</strong></p>
<p>चुनाव आयोग के मुताबिक 1000 से ज्यादा दल स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव लड़ रहे हैं। <a href="http://eci.nic.in/ElectoralLaws/OrdersNotifications/symbols170309.pdf" target="_blank">आयोग द्वारा जारी सूची</a> में सभी दल और उनके चुनाव चिन्ह तो हैं ही, पतंग, प्रेशक कुकर, केतली जैसे ऐसे चुनाव चिन्ह भी शामिल किये गये हैं जो फिलहाल किसी दल द्वारा प्रयोग नहीं किये जाते, पर किये जा सकते हैं।</p>
<p>आयोग द्वारा जारी <a href="http://eci.nic.in/ElectoralLaws/FinalListofDisqualification.pdf" target="_blank">333 पृष्ठों की एक सूची</a> में 3423 ऐसे प्रत्याशियों के नाम हैं जिन्हें आयोग ने अयोग्य ठहराते हुये उनके चुनाव में भाग लेने पर रोक लगा दी है। एक अन्य जालस्थल <a href="http://www.nocriminals.org/about_us.php" target="_blank"><em>नो क्रिमिनल्स</em></a> में मतदाताओं को आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशियों के बारे में जानकारी दी गई है। <a href="http://nocriminals.files.wordpress.com/2009/02/scanned-clips-9.pdf" target="_blank">एक खबर</a> के मुकाबिक काँग्रेस पार्टी में सबसे अधिक धनी राजनेता हैं, कुल 121 सदस्य।</p>
<p><strong>मिथक व पूर्वानुमान</strong></p>
<p>भारतीय मतदाताओं के बारे में कई मिथक विगत कई वर्षों से विद्यमान हैं। चुनाव विश्लेषक योगेंद्र यादव ने <a href="http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/7973477.stm" target="_blank">बीबीसी पर अपने लेख</a> में कुछ मिथकों को तोड़ा है। एक मिथक यह कि भारतीय महिलायें पुरुषों की तुलना में ज्यादा मतदान करती हैं। यह भी कि अपने पति की बात सुनकर वोट डालने वाली औरतों की संख्या में कमी आई है। पर वे मानते हैं कि भारतीय महिलायें अब भी वोट डालने का मामले में अपने पति के पदचिन्हों पर चलना पसंद करती हैं। युवा वोटरों पर यादव लिखते हैं</p>
<blockquote><p>कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह पता चले कि भारतीय युवा दूसरों की तुलना में राजनैतिक रूप से अधिक सक्रिय हैं। बल्कि तुलनात्मक रूप से वे कम सक्रिय होते हैं क्योंकि उनके जीवन में नौकरी की दौड़भाग जैसी अन्य चिंतायें काबिज़ रहती हैं।</p></blockquote>
<p>एक मिथक जो यादव ने नहीं तोड़ा वो  है राजनेताओं और चुवा परिणामों पर ज्योतिष और ज्योतिषियों के प्रभाव की भूमिका। अभी से ही भविष्यवाणियाँ की जाने लगी हैं की इस चुनाव में भी स्पष्ट बहुमत के अभाव में त्रिशंकु संसद बनेगी। क्या वे <a href="http://www.google.com/hostednews/afp/article/ALeqM5i8OFLm4EcdaNr1FFsUYTYO__4cKw" target="_blank">ओपिनियन पोल</a> के आधार पर यह कह रहे हैं? आप क्या सोचते हैं?</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://hi.globalvoicesonline.org/some-interesting-factoids-and-trivia/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>पाकिस्तान में SMS सेवायें प्रतिबंधित होंगी</title>
		<link>http://hi.globalvoicesonline.org/pakistan-no-sms/</link>
		<comments>http://hi.globalvoicesonline.org/pakistan-no-sms/#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 15 Apr 2009 09:54:44 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Debashish Chakrabarty</dc:creator>
				<category><![CDATA[Internet & Telecoms]]></category>
		<category><![CDATA[Pakistan]]></category>
		<category><![CDATA[Roundups]]></category>
		<category><![CDATA[Technology]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://hi.globalvoicesonline.org/?p=217</guid>
		<description><![CDATA[मूल लेखक/लेखिकारिजवान  &#183; अनुवादक Debashish Chakrabarty &#183;  मूल प्रविष्टि देखें 
जज़्बा ब्लॉग ने खबर दी है कि पाकिस्तान सरकार एसएमएस सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने का मन बना रही है ताकि इसका प्रयोग आतंकवादी हमलों के लिये न किया जा सके। देश में इस समय 70 फीसदी लोग मोबाइल फ़ोन का उपयोग करते हैं [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<em>मूल लेखक/लेखिका<a href="http://globalvoicesonline.org/author/rezwan/">रिजवान</a>  &middot; अनुवादक <a href='http://hi.globalvoicesonline.org/author/debashish/'>Debashish Chakrabarty</a> &middot;  <a href='http://globalvoicesonline.org/2009/04/14/pakistan-sm/'>मूल प्रविष्टि देखें</a></em> 
<br /><p>जज़्बा ब्लॉग ने <a href="http://jazba.wordpress.com/2009/04/14/sms-service-to-be-seized-in-pakistan-rehman-malik/" target="_blank">खबर दी है</a> कि पाकिस्तान सरकार एसएमएस सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने का मन बना रही है ताकि इसका प्रयोग आतंकवादी हमलों के लिये न किया जा सके। देश में इस समय 70 फीसदी लोग मोबाइल फ़ोन का उपयोग करते हैं जिनमें एसएमएस संदेशों के उपभोक्ता शामिल हैं।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://hi.globalvoicesonline.org/pakistan-no-sms/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>चुनावों पर भौगोलिक मैशअप</title>
		<link>http://hi.globalvoicesonline.org/india-geographical-mashup-on-election/</link>
		<comments>http://hi.globalvoicesonline.org/india-geographical-mashup-on-election/#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 15 Apr 2009 09:07:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Debashish Chakrabarty</dc:creator>
				<category><![CDATA[Elections]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[Internet & Telecoms]]></category>
		<category><![CDATA[Roundups]]></category>
		<category><![CDATA[Technology]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://hi.globalvoicesonline.org/?p=215</guid>
		<description><![CDATA[मूल लेखक/लेखिकारिज़वान  &#183; अनुवादक Debashish Chakrabarty &#183;  मूल प्रविष्टि देखें 
मैपमाईइंडिया ने भारतीय मतदाताओं के लिये एक सेवा शुरु की है जिसके द्वारा वे आगामी लोकसभा चुनावों में सही मत देने हेतु जानकारी पा सकें। इस जालस्थल पर मतदाता अपने मतदान क्षेत्र के बारें में विस्तृत जानकारी पा सकते हैं जिसमें पार्टी और [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<em>मूल लेखक/लेखिका<a href="http://globalvoicesonline.org/author/rezwan/">रिज़वान</a>  &middot; अनुवादक <a href='http://hi.globalvoicesonline.org/author/debashish/'>Debashish Chakrabarty</a> &middot;  <a href='http://globalvoicesonline.org/2009/04/14/india-geographical-mashup-on-election/'>मूल प्रविष्टि देखें</a></em> 
<br /><p><em>मैपमाईइंडिया</em> ने भारतीय मतदाताओं के लिये <a title="Elcections 2009" href="http://elections.mapmyindia.com/" target="_blank">एक सेवा</a> शुरु की है जिसके द्वारा वे आगामी लोकसभा चुनावों में सही मत देने हेतु जानकारी पा सकें। इस जालस्थल पर मतदाता अपने मतदान क्षेत्र के बारें में विस्तृत जानकारी पा सकते हैं जिसमें पार्टी और उनके प्रत्याशियों का लेखाजोखा सम्मिलित है।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://hi.globalvoicesonline.org/india-geographical-mashup-on-election/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>आम चुनावों में लगी जनता की पैनी नज़र</title>
		<link>http://hi.globalvoicesonline.org/india-the-advent-of-citizen-driven-election-monitoring/</link>
		<comments>http://hi.globalvoicesonline.org/india-the-advent-of-citizen-driven-election-monitoring/#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 14 Apr 2009 08:58:27 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ravishankar Shrivastava</dc:creator>
				<category><![CDATA[Cyber-Activism]]></category>
		<category><![CDATA[Elections]]></category>
		<category><![CDATA[English]]></category>
		<category><![CDATA[General]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[Internet & Telecoms]]></category>
		<category><![CDATA[Technology]]></category>
		<category><![CDATA[Weblog]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://hi.globalvoicesonline.org/?p=193</guid>
		<description><![CDATA[मूल लेखक/लेखिकारिजवान  &#183; अनुवादक Ravishankar Shrivastava &#183;  मूल प्रविष्टि देखें 
हम जिस युग में रह रहे हैं वहाँ  जानकारियों का अतिभार है। ज्यों ज्यों नवीन मीडिया औजार ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बना रहे हैं, साधारण लोग भी अपना रुख और अपने इलाके की मौलिक खबरें मीडिया तक पहुंचा रहे हैं। [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<em>मूल लेखक/लेखिका<a href="http://globalvoicesonline.org/author/rezwan/">रिजवान</a>  &middot; अनुवादक <a href='http://hi.globalvoicesonline.org/author/ravishankar/'>Ravishankar Shrivastava</a> &middot;  <a href='http://globalvoicesonline.org/2009/04/08/india-the-advent-of-citizen-driven-election-monitoring/'>मूल प्रविष्टि देखें</a></em> 
<br /><p>हम जिस युग में रह रहे हैं वहाँ <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Information_overload"> जानकारियों का अतिभार</a> है। ज्यों ज्यों नवीन मीडिया औजार ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बना रहे हैं, साधारण लोग भी अपना रुख और अपने इलाके की मौलिक खबरें मीडिया तक पहुंचा रहे हैं। ट्विटर और अन्य सिटिज़न मीडिया औजारों की बदौलत ढेरों जानकारी आजकल तुरत फुरत साझा कर दी जाती है। <a href="http://globalvoicesonline.org/2008/11/27/india-twitting-the-terror/"> मुम्बई आतंकी हमलों के दौरान ट्विटर के द्वारा </a> जिस तरह की रियल टाईम यानी ताज़ातरीन जानकारियाँ तुरत-फुरत मिलीं उनका भले ही कोई लेखागार न हो पर यह जानकारियाँ घटनाक्रम के समय सबके काम आईं।</p>
<p>और, ऐसे में उशाहिदी के जरिए बहुत कुछ बदला जा सकता है। <a href="http://www.ushahidi.com/">‘उशाहिदी’</a> (&#8221;गवाह&#8221; के लिये स्वाहिली शब्द) एक ऐसा औजार  है जिसका केन्या में 2008 के उत्तरार्ध में चुनाव के बाद हुई हिंसा की खबरों के आधार पर नक्शे बनाने के लिये किया गया। इससे स्थानीय पर्यवेक्षकों को अपने मोबाईल फोन या इंटरनेट द्वारा अपनी रपट  दाखिल करने की विधि मिल सकी। इस जानकारी को स्थानीय कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों ने छांट कर इसका लेखागार निर्मित किया और संबंधित घटनाओं को एक जालस्थल पर <em>जियोग्राफिकल मैशअप</em> का प्रयोग करते हुए आम पाठकों के इस्तेमाल हेतु रखा गया। इसकी  <a href="http://www.ushahidi.com/work">सफलता</a> को देखते हुए, उशाहिदी को विश्व के अनेक स्थानों पर बाद में आपदा संबंधी खबरों की रपट देने वाले औजार के रूप में प्रयुक्त किया गया।</p>
<p><em>एरिक हर्समेन </em>, जो उशाहिदी प्रकल्प में शामिल बहुत से व्यक्तियों में से एक हैं, उशाहिदी द्वारा जानकारियों को छानने की प्रक्रिया के बारे में <a href="http://blog.ushahidi.com/index.php/2009/02/04/crisis-info-crowdsourcing-the-filter/">बताते</a> हैं:</p>
<div class="wp-caption aligncenter" style="width: 480px"><a href="http://globalvoicesonline.org/wp-content/uploads/2009/04/ushahidi.jpg"><img style="border: 0pt none; margin: 0px;" title="ushahidi" src="http://globalvoicesonline.org/wp-content/uploads/2009/04/ushahidi.jpg" alt="Crowdsourcing the filter: how does it work?" width="470" /></a><p class="wp-caption-text">छन्नी की क्राउडसोर्सिंग : आखिर ये काम कैसे करता है?</p></div>
<p>एक अच्छी खबर ये है कि उशाहिदी मॉडल को भारत में भी  काम में लिया जा रहा है।  उशाहिदी इंजिन पर आधारित, जनता के सहयोग से प्रचालित, चुनावों पर नज़र रखने का एक मंच  <a href="http://votereport.in/">वोट रिपोर्ट इंडिया </a> बनाया गया है जो भारत में होने जा रहे <a href="http://globalvoicesonline.org/specialcoverage/indian-elections-2009/"> आम चुनावों</a> पर नज़र रखेगा।</p>
<p><em>एरिक हर्समेन </em> <a href="http://blog.ushahidi.com/index.php/2009/04/07/vote-report-india-launches/">लिखते हैं</a>:</p>
<blockquote><p>उशाहिदी के हमने बहुत से प्रयोग देखे हैं, परंतु  <a href="http://www.gauravonomics.com/">गौरव मिश्र</a> द्वारा बनाए गए इस भारतीय प्रकल्प की बात कुछ अलग है। इसे बहुत ही व्यवस्थित बनाया गया है और इसमें ज्यादा से ज्यादा सामुदायिक इनपुट की गुंजाइश रखी गई है. <a href="http://emoksha.org/">ईमोक्ष</a>, नाम के अ-विभाजन अ-लाभकारी संस्था जो कि जनता के सक्रिय भागीदारी और जानकारी के बल पर गणतंत्र को मजबूत बनाने के क्षेत्र में लगी है, के <strong>सेलवम वेलमुरुगन</strong> ने इसके तकनीकी हिस्सों को सजाया संवारा है.</p></blockquote>
<p style="text-align: center;"><a href="http://votereport.in/"><img class="aligncenter" style="border: 0pt none; margin: 0px;" title="vote_report_india_header" src="http://globalvoicesonline.org/wp-content/uploads/2009/04/vote_report_india_header.jpg" alt="vote_report_india_header" width="500" height="68" /></a></p>
<blockquote><p>एक दिलचस्प बात ये है कि भारतीयों के पास पहले से ही ट्विटर जैसी एक सेवा <a href="http://www.smsgupshup.com/">एसएमएस गपशप</a> है जिसके बहुत से चैनलों के लाखों पंजीकृति उपयोक्ता हैं। इसकी टोली देश के बड़े 8 शहरों के लिए (उदाहरण के लिए, वोटरिपोर्टमुम्बई, वोटरिपोर्टदिल्ली इत्यादि…) ट्विटर और एसएमएसगपशप पर अपडेट खाता बना रही है. फिर उपयोक्ता इन शहरों के चुनाव जानकारी संबंधी आरएसएस फीड को इन चार विकल्पों में से किसी एक को चुनकर अपने आप को उन संदेशों से बराबर सजग और सतर्क बनाए रख सकते हैं: ईमेल द्वारा, आरएसएस फीड द्वारा, ट्विटर पर एसएमएस द्वारा या एसएमएसगपशप द्वारा.</p></blockquote>
<p><em>वोट रिपोर्ट इंडिया के गौरव मिश्र </em>जो कि  <a href="http://globalvoicesonline.org/author/gaurav/">ग्लोबल वॉइसेज़ के लेखक भी हैं </a>, अपने ब्लॉग में  <a href="http://www.gauravonomics.com/blog/the-story-behind-vote-report-india-citizen-powered-election-monitoring/">लिखते हैं</a> :</p>
<blockquote><p>मूलतः उपयोक्ता सीधे ही एसएमएस, ईमेल या वेब रपटों के जरिए <a href="http://eci.nic.in/faq/faq_mcc.pdf">चुनाव आयोग के मॉडल आचार संहिता (पीडीएफ़)</a> के उल्लंघनों के बारे में बताते हैं. यह मंच फिर तमाम संसाधनों से प्राप्त इन समाचार रपटों, ब्लॉग पोस्टों, फोटो, वीडियो और ट्वीट को व्यवस्थित रूप से एक स्थल पर इंटरेक्टिव नक्शे पर जमा कर रखती है.</p>
<p>हमें उम्मीद है कि वोट रिपोर्ट इंडिया भारतीय चुनावों में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बोध को बढ़ाने में सहायक तो होगी ही, साथ में चुनावों के दौरान जनता की आम राय के बारे में एक परिपूर्ण परिदृश्य गढ़ने में सहायक होगी।</p></blockquote>
<p>अपने पिछले पोस्ट में <em>गौरव </em> ने ट्विटर और उशाहिदी की तुलना की थी कि भारतीय परिप्रेक्ष्य में <a href="http://www.gauravonomics.com/blog/which-is-a-better-mobile-citizen-reporting-tool-twitter-or-ushahidi/">मोबाइल नागरिक रपट औजार के रूप में इन दोनों में से बेहतर कौन हो सकता है</a>.</p>
<p><a href="http://votereport.in/" target="_blank"><img class="alignright" style="border: 0pt none; margin: 8px;" title="vote-report-india-badge" src="http://globalvoicesonline.org/wp-content/uploads/2009/04/vote-report-india-badge.jpg" alt="vote-report-india-badge" width="150" height="150" /></a> <a href="http://votereport.in/"> वोट रिपोर्ट इंडिया </a> को कोई भी भारतीय निम्न चार तरीकों से रपट भेज सकता है:</p>
<ul>
<li>5676785 को एसएमएस करके</li>
<li><a href="mailto:report@votereport.in">report@votereport.in</a> को ईमेल भेज कर</li>
<li>हैश टैग #votereport के साथ ट्विटर पर</li>
<li>तथा ऑनलाइन इस  <a href="http://votereport.in/reports/submit">वेब फार्म</a> के जरिए</li>
</ul>
<p><small><em>अनुवाद में सहयोग - <a href="http://hi.globalvoicesonline.org/author/debashish/" target="_blank">देबाशीष</a></em></small></p>
<p style="text-align: center;"><small><em>यह पोस्ट  <a href="http://globalvoicesonline.org/specialcoverage/indian-elections-2009/">ग्लोबल वॉइसेज़ पर 2009 के भारतीय चुनावों के विशेष कवरेज का एक हिस्सा है </a></em></small></p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://hi.globalvoicesonline.org/india-the-advent-of-citizen-driven-election-monitoring/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>नया बाँग्ला यूनिकोडित समाचार एग्रीगेटर</title>
		<link>http://hi.globalvoicesonline.org/bangla-news-headline-aggregator-in-unicode/</link>
		<comments>http://hi.globalvoicesonline.org/bangla-news-headline-aggregator-in-unicode/#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 13 Dec 2008 09:51:39 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Debashish Chakrabarty</dc:creator>
				<category><![CDATA[Bangla]]></category>
		<category><![CDATA[Bangladesh]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[Internet & Telecoms]]></category>
		<category><![CDATA[Roundups]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://hi.globalvoicesonline.org/?p=188</guid>
		<description><![CDATA[मूल लेखक/लेखिकाRezwan  &#183; अनुवादक Debashish Chakrabarty &#183;  मूल प्रविष्टि देखें 
ओन अ ट्रेल लेस ट्रैवल्ड ने एक नई साईट काशफूल का ज़िक्र किया है जो बाँग्लादेश व भारत से प्रकाशित बाँग्ला आनलाईन समाचार पत्रों से समाचारों की सुर्खियाँ दिखाता है। यह विभिन्न डायनेमिक फाँट का उपयोग करने वाली साईटों की सुर्खियाँ भी यूनिकोड [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<em>मूल लेखक/लेखिका<a href="http://globalvoicesonline.org/author/rezwan/">Rezwan</a>  &middot; अनुवादक <a href='http://hi.globalvoicesonline.org/author/debashish/'>Debashish Chakrabarty</a> &middot;  <a href='http://globalvoicesonline.org/2008/12/10/bangla-news-headline-aggregator-in-unicode/'>मूल प्रविष्टि देखें</a></em> 
<br /><p><i>ओन अ ट्रेल लेस ट्रैवल्ड</i> ने एक नई साईट <a href="http://www.kashphool.com/headlines.html">काशफूल</a> का <a href="http://methopath.wordpress.com/2008/12/09/bengali-newspapers-in-google-news/">ज़िक्र किया</a> है जो बाँग्लादेश व भारत से प्रकाशित बाँग्ला <i>आनलाईन</i> समाचार पत्रों से समाचारों की सुर्खियाँ दिखाता है। यह विभिन्न <i>डायनेमिक फाँट</i> का उपयोग करने वाली साईटों की सुर्खियाँ भी यूनिकोड में परिवर्तित कर दिखाता है।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://hi.globalvoicesonline.org/bangla-news-headline-aggregator-in-unicode/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>मिस्र : गूगल ब्लॉगर ने नवारा के ब्लॉग को प्रतिबंधित किया</title>
		<link>http://hi.globalvoicesonline.org/egypt-blogger-blocks-nawaras-blog/</link>
		<comments>http://hi.globalvoicesonline.org/egypt-blogger-blocks-nawaras-blog/#comments</comments>
		<pubDate>Sun, 16 Nov 2008 09:59:40 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ravishankar Shrivastava</dc:creator>
				<category><![CDATA[Arabic]]></category>
		<category><![CDATA[Blogger News]]></category>
		<category><![CDATA[Egypt]]></category>
		<category><![CDATA[Freedom of Speech]]></category>
		<category><![CDATA[Human Rights]]></category>
		<category><![CDATA[Internet & Telecoms]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://hi.globalvoicesonline.org/?p=186</guid>
		<description><![CDATA[मूल लेखक/लेखिकातारीक अमर  &#183; अनुवादक Ravishankar Shrivastava &#183;  
प्रतीत होता है कि आम जनता के ब्लॉगों पर प्रतिबंध लगाना सिर्फ तीसरी दुनिया के  सरकारों की ही बपौती नहीं रह गई है.   गूगल का ब्लॉगस्पॉट भी इस बैंडबाजे में शामिल  हो गया लगता है, और वो भी धूमधड़ाके से. गूगल ब्लॉगस्पॉट ने नवारा नेगम के  ब्लॉग  (तहयीज [अर.]), पर [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<em>मूल लेखक/लेखिका<a href="http://globalvoicesonline.org/author/tarek-amr/">तारीक अमर</a>  &middot; अनुवादक <a href='http://hi.globalvoicesonline.org/author/ravishankar/'>Ravishankar Shrivastava</a> &middot; </em> 
<br /><p>प्रतीत होता है कि आम जनता के ब्लॉगों पर प्रतिबंध लगाना सिर्फ तीसरी दुनिया के  सरकारों की ही बपौती नहीं रह गई है.   गूगल का ब्लॉगस्पॉट भी इस बैंडबाजे में शामिल  हो गया लगता है, और वो भी धूमधड़ाके से. गूगल ब्लॉगस्पॉट ने नवारा नेगम के  ब्लॉग  (<a href="http://tahyyes.blogspot.com/">तहयीज [अर.]</a>), पर बिना कारण  बताए प्रतिबंध लगा दिया. <a href="http://shokeir.blogspot.com/2008/11/blog-post_15.html">अहमद शोकीर</a> इस बारे में विस्तार से लिखते हैं:</p>
<div class="arabic">مع الساعات الأخيرة من الليل وبينما الكل يتأهب للذهاب للفراش ،  فوجئ مجتمع المدونين على الجايكو بخبر غير متوقع صطدم الجميع … وهو تعليق مدونة  نوارة نجم الشهيرة بجبهة التهييس الشعبية … لمخالفتها شروط الإستخدام حسب تعبير  البلوجر</div>
<div class="translation">तमाम चिट्ठाकार जब रात को सोने जा रहे थे तो उन्हें  <a href="http://tafatefo.jaiku.com/presence/48940548#c-1801244">जायकू</a> के  जरिए आश्चर्यचकित करने वाला संदेश मिला जिसमें बताया गया था कि नवारा नेगम के ब्लॉग  [गभेत अल तहयीज अल शबेया] पर गूगल ने प्रतिबंध लगा दिया है चूंकि वहां गूगल ब्लॉगर  की सेवा शर्तों का उल्लंघन किया जा रहा था.</div>
<div class="arabic">نوارة … وطبقا لإحصائيات جوجل ريدر تنشر أربعة وعشرون وسبعة من  عشر تدوينة في الإسبوع أي مايزيد عن أكثر من ثلاث تدوينات ونصف يومياً .. مَن مِن  البشر يستطيع أن ينشر هذا الكم من التدوينات التي تحمل رأي وفكر وتحليل ؟ ، تدوينات  نوارة بلاشك مدرسة خاصة في الكتابة حملت أسلوباً مبتكراً وجديداً في الكتابة  العامية لا يجيده أحد سواها</div>
<div class="translation">नवारा … गूगल रीडर के आंकड़ों को मानें तो इस ब्लॉग पर  प्रति सप्ताह 24.7 ब्लॉग पोस्टें याने कि कोई 3.5 पोस्टें प्रतिदिन प्रकाशित हो रही  थीं. नवारा के अलावा और कौन इतनी संख्या में लाजवाब, विश्लेषणों और नए विचारों से  भरपूर पोस्टें प्रकाशित कर सकता है भला?  ? नवारा के पास अपनी अलग, विशिष्ट शैली है  जिसमें वो गैर-पारंपरिक अरबी अपभाषा [स्लैंग] का भरपूर प्रयोग करती रही हैं.</div>
<div class="arabic">أتوقع أن مدونتها سوف تعود في خلال أيام قليلة بعد مراجعة بلوجر  لها ورفع التعليق ، فلايوجد في مدونتها مايخرق بأي شكل من الأشكال شروط بلوجر ،  ولكن حتى العودة يظل الجميع متشككاً في عودتها</div>
<div class="translation">मुझे उम्मीद है कि उनका ब्लॉग यथा शीघ्र वापस आ जाएगा –  ब्लॉगर पूरी जांच पड़ताल कर ले – उसे नवारा के लिखे में कुछ भी ऐसा नहीं मिलेगा जो  गूगल-ब्लॉगर की सेवा शर्तों का उल्लंघन करता हो. परंतु तब तक के लिए हममें से हर  किसी के मन में नवारा के ब्लॉग की वापसी का संदेह तो बना  ही रहेगा.</div>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://hi.globalvoicesonline.org/egypt-blogger-blocks-nawaras-blog/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>1</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>भारत : वीडियो स्वयंसेवकों के जरिए सामुदायिक पत्रकारिता</title>
		<link>http://hi.globalvoicesonline.org/community-journalism-with-video-volunteers/</link>
		<comments>http://hi.globalvoicesonline.org/community-journalism-with-video-volunteers/#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 14 Oct 2008 08:02:51 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ravishankar Shrivastava</dc:creator>
				<category><![CDATA[Arts & Culture]]></category>
		<category><![CDATA[Cyber-Activism]]></category>
		<category><![CDATA[Film]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Humanitarian]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[Internet & Telecoms]]></category>
		<category><![CDATA[Protest]]></category>
		<category><![CDATA[Video]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://hi.globalvoicesonline.org/?p=185</guid>
		<description><![CDATA[मूल लेखक/लेखिकाजूलियाना रिंकान पार्रा  &#183; अनुवादक Ravishankar Shrivastava &#183;  मूल प्रविष्टि देखें 

भारत के गांवों और झुग्गी झोपड़ियों में रहने वालों की एक गैरलाभकारी संस्था ‘वीडियो स्वयंसेवक’ (वीडियो वालंटियर्स) है. यह संस्था उस तरह की वीडियो सामग्री बनाती है जो सीधे-सीधे उनके सामाजिक सारोकारों को प्रभावित करते हैं. सामाजिक समस्या उठाने वाले समाचार [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<em>मूल लेखक/लेखिका<a href="http://globalvoicesonline.org/author/juliana-rincon-parra/">जूलियाना रिंकान पार्रा</a>  &middot; अनुवादक <a href='http://hi.globalvoicesonline.org/author/ravishankar/'>Ravishankar Shrivastava</a> &middot;  <a href='http://globalvoicesonline.org/2008/10/11/india-community-journalism-with-video-volunteers/'>मूल प्रविष्टि देखें</a></em> 
<br /><div id="single" class="entry">
<p>भारत के गांवों और झुग्गी झोपड़ियों में रहने वालों की एक गैरलाभकारी संस्था <strong>‘वीडियो स्वयंसेवक’</strong> (वीडियो वालंटियर्स) है. यह संस्था उस तरह की वीडियो सामग्री बनाती है जो सीधे-सीधे उनके सामाजिक सारोकारों को प्रभावित करते हैं. सामाजिक समस्या उठाने वाले समाचार व घटना प्रधान वीडियो को यह संस्था समुदाय के हजारों लाखों लोगों के बीच प्रदर्शित करती है, जिससे जन जागृति होती है और लोगों में कुछ कर गुजरने की भावना उभरती है.&#160; सामुदायिक वीडियो सामग्री जिसे सामुदायिक वीडियो स्वयंसेवकों द्वारा ही आमतौर पर तैयार किया जाता है, उसे प्रभावी तरीके से जन जन तक पहुँचाने का प्रयास ऑनलाइन वीडियो चैनल <a href="http://www.ch19.org/">चैनल 19 </a>द्वारा बखूबी किया जा रहा है. </p>
<p>वीडियो स्वयंसेवकों द्वारा प्रस्तुत नीचे दिए गए ताजातरीन वीडियो में विश्व की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती धारावी में हड़ताल के बारे में हालात दर्ज हैं. इस हड़ताल के पीछे शासन का वह निर्णय है जिसके तहत प्रत्येक झुग्गीवासी को प्रति परिवार 400 वर्गफुट जमीन देने के पूर्व के वायदे से पलटकर अब सिर्फ 300 वर्गफुट जमीन दी जा रही है.&#160; <a href="http://mx.youtube.com/watch?v=hlf8cZICJuk">ब्लैक डे इन धारावी</a>&#160; नाम के इस वीडियो में पूरी कहानी दर्ज है. जाहिर है, इस वीडियो को भी स्वयंसेवकों ने ही बनाया है:</p>
<p><object><embed src="http://www.youtube.com/v/hlf8cZICJuk&amp;hl=en&amp;fs=1" type="application/x-shockwave-flash" allowfullscreen="true" width="425" height="344"></object></p>
<p>वीडियो स्वयंसेवकों द्वारा चैनल 19 के लिए बनाए गए अन्य वीडियो भी गहरी अंतर्दृष्टि युक्त व प्रेरक बन पड़े हैं.&#160; <a href="http://mx.youtube.com/watch?v=YJa4Q18DiHc">वीमन कैन प्ले टू !</a>&#160; नाम के वीडियो में सामुदायिक पत्रकारों ने&#160; झुग्गीवासियों से प्रश्न पूछा कि बच्चे यहाँ किस तरह खेल पाते हैं. पता चला कि लड़के तो भले ही खेल कूद लेते हैं, परंतु लड़कियाँ चौका-बर्तन में ही लगी रहती हैं. तो उन्होंने एक क्रिकेट खिलाड़िन से खेल के महत्व के बारे में बातचीत दर्ज की जिससे लड़कियों को भी खेल के महत्व के बारे में बताया जा सके, और वे भी कुछ प्रेरणा ले सकें. ऐसे ही एक अन्य वीडियो <a href="http://mx.youtube.com/watch?v=Q5s7MUvICNM">नेवर टू लेट टू टीच </a>में कचरा बीनने वाली एक स्त्री की कहानी है जिसने अपना भविष्य बदलने का निर्णय किया और शिक्षिका बनने के लिए पढ़ना शुरू कर दिया. </p>
</div>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://hi.globalvoicesonline.org/community-journalism-with-video-volunteers/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>भारत : चिट्ठा चोरी के बाद धमकी, धौंसपट्टी और सीनाजोरी</title>
		<link>http://hi.globalvoicesonline.org/india-bullying-bloggers-stealing-content-and-threats/</link>
		<comments>http://hi.globalvoicesonline.org/india-bullying-bloggers-stealing-content-and-threats/#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 11 Jun 2008 10:32:04 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ravishankar Shrivastava</dc:creator>
				<category><![CDATA[English]]></category>
		<category><![CDATA[Freedom of Speech]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[Internet & Telecoms]]></category>
		<category><![CDATA[Law]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://hi.globalvoicesonline.org/?p=169</guid>
		<description><![CDATA[मूल लेखक/लेखिकानेहा विश्वनाथन  &#183; अनुवादक Ravishankar Shrivastava &#183;  मूल प्रविष्टि देखें 
जाल जगत् में चिट्ठाकार एक तरह से असुरक्षित ही बने रहते हैं. अनाम या छद्म नामधारी होने के बावजूद मिलने वाली धमकियाँ ये सिद्ध करती हैं कि कोई चिट्ठा कितना महत्वपूर्ण हो सकता है. इंजी पेन्नु तथा केरल्स.कॉम के प्रकरण ने चिट्ठासंसार [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<em>मूल लेखक/लेखिका<a href="http://globalvoicesonline.org/author/neha-viswanathan/">नेहा विश्वनाथन</a>  &middot; अनुवादक <a href='http://hi.globalvoicesonline.org/author/ravishankar/'>Ravishankar Shrivastava</a> &middot;  <a href='http://globalvoicesonline.org/2008/06/09/india-bullying-bloggers-stealing-content-and-threats/'>मूल प्रविष्टि देखें</a></em> 
<br /><p>जाल जगत् में चिट्ठाकार एक तरह से असुरक्षित ही बने रहते हैं. अनाम या छद्म नामधारी होने के बावजूद मिलने वाली धमकियाँ ये सिद्ध करती हैं कि कोई चिट्ठा कितना महत्वपूर्ण हो सकता है. इंजी पेन्नु तथा केरल्स.कॉम के प्रकरण ने चिट्ठासंसार में तूफ़ान सा मचा दिया है. केरल तथा मलयाली भाषा पर आधारित केरल्स.कॉम ने एक चिट्ठाकारा को डराने व धमकाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. चिट्ठाकारा इंजी पेन्नु जो  <em><a href="http://myinjimanga.blogspot.com/2008/06/stealing-threat-cyber-stalking-abuse.html">जिंजर एंड मैंगो</a></em> नाम का चिट्ठा लिखती हैं, ने केरल्स.कॉम से बड़े ही नम्रता पूर्वक निवेदन किया कि उनके चिट्ठे से चोरी कर उठाई गई सामग्री को केरल्स.कॉम से हटा दिया जाए. बाद में इंजी ने केरल्स.कॉम के अनपेक्षित प्रत्युत्तर का विरोध किया. इंजी तथा केरल्स.कॉम के बीच हुए पत्राचार के प्रकाशित होने पर इंजी के चिट्ठा पाठकों की आक्रोषित प्रतिक्रियाएं रहीं. चिट्ठों से सामग्री चोरी की घटनाएं नई नहीं हैं, परंतु जिस साइट ने सामग्री चोरी की, उसके द्वारा सीना जोरी किया जाना, धमकियाँ दिया जाना, धौंसपट्टी जमाना – ये जरूर कुछ अलहदा सा रहा.</p>
<div id="full-article">
<div class="post">
<div id="single" class="entry">
<blockquote><p>फिर उसके बाद धमकियों, दुर्व्यव्हार और नक़ली कानूनी नोटिस का दौर चला. केरल्स.कॉम के इन गलत कार्यों की आलोचना करने वाले पोस्टों को हटाने के लिए उन्होंने चिट्ठाकारों को आदेशित करना शुरू कर दिया. यह तो सचमुच पागलपन था – चिट्ठाकारों को इस तरह आदेशित करना. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के क्या यही मायने हैं?…..</p>
<p>इसके बाद श्री शिव कुमार ने मुझे मेरे बोलने की सजा के तौर पर शारीरिक क्षति पहुँचाने की धमकी दी. उन्होंने अपने अगले ईमेल में कहा कि वो मेरे जैसे लोगों के लिए अप्रत्याशित, अनपेक्षित वार करना जानते हैं.</p></blockquote>
<p><em><a href="http://shabdashilp.blogspot.com/2008/06/support-to-inji-pouring-from-hindi.html">हिन्दी ब्लॉग रिपोर्टर</a></em> ने लिखा</p>
<blockquote><p>अपने ताजातरीन पोस्ट में उन्होंने साइबर उद्योग के इस पुरातन समूह से प्राप्त धमकी भरे ईमेल के उदाहरण दिए. संक्षिप्त से शोध के उपरांत इंजी को ज्ञात हुआ कि यह समूह  पॉर्न साइट तो चलाता ही है, साथ ही अनाथों के लिये कुछ दान दक्षिणाएँ भी मुहैया कराता है.</p></blockquote>
<p>यह भी पता चला कि केरल्स.कॉम ने अन्य चिट्ठों से भी सामग्रियों की चोरी की और उनके नाम से प्रकाशित कर दिया जबकि उन्होंने ये सामग्रियाँ लिखी ही नहीं थीं.  <em><a href="http://jrajansblog.blogspot.com/2008/06/protest-against-content-theft-and.html">जयरंजन्स ब्लॉग</a></em> ने लिखा</p>
<blockquote><p>केरल्स.कॉम द्वारा मलयालम चिट्ठों से सामग्री की चोरी की मैं तीखे शब्दों में भर्त्सना करता हूं. इसके अलावा, केरल्स.कॉम की सपोर्ट टीम ने उन साथी चिट्ठाकारों, जिन्होंने इस घृणास्पद कार्य की निंदा की, उन्हें धमकाया व उनसे दुर्व्यव्हार किया और, जैसे कि यह काफी नहीं था, उन्होंने साइबरशिकार जैसे प्रयास भी किए.</p></blockquote>
<p><a href="http://kakkat.blogspot.com/2008/05/content-theft-by-keralscom.html">तुलसी </a> ने कुछ गहरी छानबीन की, और लिखा</p>
<blockquote><p>हाल ही में मैंने नोट किया कि माझाथल्ली.कॉम ने कॉपीराइट का उल्लंघन किया है. उन्होंने मेरे इस चिट्ठे से बगैर मेरी अनुमति या लिखित सहमति के अथवा बगैर मुझे श्रेय दिए, मेरे फोटोग्राफों को नक़ल किया. यही नहीं, उन्होंने मेरे उन चित्रों में केरल्स.कॉम का वाटरमार्क भी लगा दिया. इसके बाद मैंने आगे की जांच पड़ताल की तो पाया कि यो दोनों साइटें एक ही कंपनी – <strong>अनश्वर कंपनी प्रा. लि</strong>. की संपत्ति हैं. मुझे यह जानकर धक्का लगा कि वह व्यक्ति जिसने मेरे चित्रों की नक़ल की थी, उसमें अपने नाम व अपनी कंपनी  के नाम का वाटरमार्क लगाया, वो कोई और नहीं, बल्कि केरल्स.कॉम का सीईओ है.</p></blockquote>
<p><a href="http://saptavarnangal.blogspot.com/2008/06/keralscom-boologam-malayalam.html">सप्तवरंगल</a> ने इस विवाद का विस्तृत खाका खींचा कि घटनाएं तरतीबवार किस तरह होती रहीं. उन्होंने इसी समूह के अन्य जाल स्थलों के बारे में भी कुछ पड़ताल की.</p>
<blockquote><p>जैसा कि अब हम सबको पता है, केरल्स.कॉम पोर्टल के मलयालम खंड में भरने के लिए बहुत से मलयालम चिट्ठों से सामग्री चुराई गई. इसके बारे में सबसे पहले साजी ने बताया, और फिर उसके बाद जब बहुत से चिट्ठाकारों ने बताना शुरू किया तो केरल्स.कॉम द्वारा सामग्री चोरी के विस्तार का पता चला. एक अन्य साइट http://www.mazhathully.com/ ने तुलसी तथा कुमार के फोटोब्लॉग से फोटो चुराए.( मैंने केरल्स.कॉम के जरिए एक शुभकामना संदेश कुमार को भेजा था तो उसे देखते ही कुमार ने कहा कि यह फोटो उनके फोटो ब्लॉग में प्रकाशित है और बिना अनुमति के प्रयोग किया गया है. फिर उन्होंने केरल्स.कॉम को इस फोटो को हटाने के लिए लिखा.) केरल्स.कॉम तथा माझाथल्ली.कॉम एक ही ( गोडैडी.कॉम जाँच) कंपनी ‘अनश्वर ग्रुप ऑफ कंपनी प्रा. लि.&#39; के हैं जो कि अमरीका तथा भारत के नक़ली पता का इस्तेमाल कर रहे हैं. जब मैंने आज जांच पड़ताल की तो पाया कि  http://www.mazhathully.com/ साइट अभी निलंबित स्थिति में है.</p></blockquote>
<p><em><a href="http://nalanz.wordpress.com/2008/06/07/keralscom-turns-out-be-mafialand/">द ब्रीज</a></em> ने उल्लेख किया कि केरल्स.कॉम के एक प्रतिनिधि ने इंजी पेन्नु का नाम घसीटा और एक नक़ली वेबसाइट तैयार किया.</p>
</div>
</div>
</div>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://hi.globalvoicesonline.org/india-bullying-bloggers-stealing-content-and-threats/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>4</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>इस सप्ताह की चिट्ठाकारा : जिलियन यॉर्क</title>
		<link>http://hi.globalvoicesonline.org/blogger-of-the-week-jillian-york/</link>
		<comments>http://hi.globalvoicesonline.org/blogger-of-the-week-jillian-york/#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 22 May 2008 08:12:28 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ravishankar Shrivastava</dc:creator>
				<category><![CDATA[Cyber-Activism]]></category>
		<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[English]]></category>
		<category><![CDATA[Entertainment]]></category>
		<category><![CDATA[Freedom of Speech]]></category>
		<category><![CDATA[GV Contributor Profiles]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[International Relations]]></category>
		<category><![CDATA[Internet & Telecoms]]></category>
		<category><![CDATA[Media]]></category>
		<category><![CDATA[Morocco]]></category>
		<category><![CDATA[Music]]></category>
		<category><![CDATA[Travel]]></category>
		<category><![CDATA[Weblog]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://hi.globalvoicesonline.org/?p=161</guid>
		<description><![CDATA[मूल लेखक/लेखिकाअमीरा अल हुसैनी  &#183; अनुवादक Ravishankar Shrivastava &#183;  मूल प्रविष्टि देखें 


सप्ताह के चिट्ठाकार में आज मोरक्को की लेखिका  जिलियन सी यॉर्क  से बातें करते हैं जो कि  वाइसेज विदाउट वोट्स  में भी नियमित लिखती रही हैं.  मेकेन्स, मोरक्को में दो साल बिताने के बाद वर्तमान में [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<em>मूल लेखक/लेखिका<a href="http://www.globalvoicesonline.org/author/amira-al-hussaini/">अमीरा अल हुसैनी</a>  &middot; अनुवादक <a href='http://hi.globalvoicesonline.org/author/ravishankar/'>Ravishankar Shrivastava</a> &middot;  <a href='http://www.globalvoicesonline.org/2008/05/18/blogger-of-the-week-jillian-york/'>मूल प्रविष्टि देखें</a></em> 
<br /><div id="single" class="entry">
<p><img src="http://www.globalvoicesonline.org/wp-content/uploads/2008/05/jillian.jpg" alt="Jillian York" /></p>
<p>सप्ताह के चिट्ठाकार में आज मोरक्को की लेखिका  <a href="http://www.globalvoicesonline.org/author/jillian-york/"><em>जिलियन सी यॉर्क </em></a> से बातें करते हैं जो कि <em><a href="http://voiceswithoutvotes.org/author/jillian-york/"><em> वाइसेज विदाउट वोट्स </em></a></em> में भी नियमित लिखती रही हैं.  मेकेन्स, मोरक्को में दो साल बिताने के बाद वर्तमान में बोस्टन, अमरीका में निवास कर रहीं जिलियन स्वतंत्र लेखिका हैं, चिट्ठाकारा हैं तथा मोरक्को गाइड बुक की लेखिका भी हैं. वे अपने <a href="http://jilliancyork.com/">ब्लॉग</a> में नियमित लिखती रही हैं. लेखन, राजनीति, संगीत, सामाजिक सक्रियता तथा निवासी पत्रकारों (सिटिजन जर्नलिस्ट) के लेखन को पहचान प्रदान करना उनके पसंदीदा विषय रहे हैं. यह रहा जिलियन से लिया गया साक्षात्कार - जिससे आप उनके बारे में बहुत कुछ और जान सकेंगे:</p>
<p><strong>आपकी शैक्षणिक पृष्भूमि क्या है? </strong></p>
<blockquote><p>मैंने अमरीका के बिंघमटन विश्वविद्यालय से एक अतिरिक्त विषय नाट्यशास्त्र के साथ, समाजशास्त्र में स्नातक उपाधि प्राप्त की है.  मैंने समाजशास्त्र में अपनी पढ़ाई मध्यपूर्व तथा उत्तरी अफ्रीक्री देशों पर केंद्रित की थी तथा अपना शोधग्रंथ &#8216;अमरीकी मीडिया में अरबी लोगों के प्रति दृष्टिकोण&#39; विषय पर पूरा किया. मेरी पढ़ाई के विषय ने मुझे मोरक्को को करीब से देखने का मौका दिया.  मैंने अल अखवायन विश्वविद्यालय में ग्रीष्मकालीन अरबी कार्यक्रम में भी हिस्ला लिया था और अमरीका वापस आने के बाद अगले वर्ष वहाँ वापस जाने की कोशिशें जारी रही थीं.</p></blockquote>
<p><strong>आपकी आजीविका क्या है? </strong></p>
<blockquote><p>मैं अभी अपने अंतिम लक्ष्य - पूर्णकालिक लेखिका बनने हेतु प्रयासरत हूं.  मोरक्को पहुंचने के थोड़े ही समय के बाद मैंने &#8216;कल्चर स्मार्ट! मोरक्को&#39; (रेंडम हाउस, 2006) लिखा और फिर तब से ढेरों आलेख लिखे. हाल ही में, मुझे मोरक्को में दो वर्ष के लिए अंग्रेजी पढ़ाने का अवसर भी मिला था जो मेरी अब तक की आजीविकाओं में सर्वाधिक आनंददायी रहा था!</p></blockquote>
<p><strong> जिलियन यॉर्क कौन है ? कौन सी चीजें आपको आकर्षित करती हैं और किन चीजों से आपको चिढ़ मचती है ?</strong></p>
<blockquote><p>निश्चित रूप से मैं &#8216;टाइप ए&#39; क़िस्म की व्यक्ति हूं जो अधिक से अधिक काम करने में विश्वास रखते हुए हमेशा व्यस्त रहते हैं. मुझे चिट्ठाकारी व नया मीडिया आकर्षित करता है - मैं पहली चिट्ठाकारा थी जिसने मोरक्को के बारे में अंग्रेजी में पहली मर्तबा लिखा. और जब मैं मोरक्को में थी तो मैंने उदीयमान होते ब्लोगोमा (मोरक्को चिट्ठाजगत्) को देखा जो अब तेजी से पैर पसार रहा है. चिट्ठाकारी एक ऐसा चकित कर देने वाला माध्यम है जो एक साधारण व्यक्ति को भी अपने मन की बात सबके सामने बिना किसी परेशानी के रख देने की सुविधा तो देता ही है,  हम सभी को विभिन्न सांस्कृतिक ढांचों के बारे में जानने समझने का बेहतरीन माध्यम भी प्रदान करता है (तब भी जब हम एक दूसरे के लिए अधिक अजूबे न हों!). और, जहाँ तक उन चीजों के बारे में, जिनसे मुझे चिढ़ है - तो वे भी बहुत सी हैं, परंतु यदि अभी की बात लें तो वो है पूर्वग्रह ग्रस्त अमरीकी मीडिया.  कोई भी अमरीकी जो अमरीका से बाहर हफ़्ता दो हफ़्ता भी गुजार आता है वो ये समझ सकता है कि मुझे कैसा महसूस होता होगा.  विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता के मामले में मोरक्को कोई गढ़ तो नहीं है, परंतु वहां पर वैश्विक समाचारों पर आपकी पहुँच यहाँ अमरीका से कहीं ज्यादा बेहतर है.</p></blockquote>
<p><strong>आप कितने समय से चिट्ठाकारी कर रही हैं और क्यों?</strong></p>
<blockquote><p>मैंने 2005 में चिट्ठा लेखन प्रारंभ किया - तब, जब मैं मोरक्को पहली मर्तबा गई थी और तब से मैं अपने उस गोद लिए देश मोरक्को के बारे में लिखती आ रही हूं. पिछले अगस्त में अमरीका वापस आने के बाद भी.</p></blockquote>
<p><strong>आप जीवीओ की सदस्या कब से हैं और क्यों?</strong></p>
<blockquote><p>अप्रैल 2006 से - मैं उगते बढ़ते मोरक्को ब्लॉगमा में ज्यादा से ज्यादा शामिल होना चाहती थी और इसी कारण मैंने जीवीओ के क्षेत्रीय मध्य-पूर्व व उत्तरी अफ्रीकी संपादक अमीरा अल हुसैनी से संपर्क किया. और फिर, बाकी का सारा तो इतिहास में दर्ज हो चुका है.</p></blockquote>
<p><strong>आपके अपने ब्लॉगजगत् को कौन सी चीजें प्रभावित करती हैं ?</strong></p>
<blockquote><p>मोरक्को ब्लॉगोमा के साथ ये सौभाग्य है कि यहाँ के लेखक मनमर्जी के विषय चुनने के लिए पूरे स्वतंत्र हैं.  दुर्भाग्यवश, मोरक्को में भी इंटरनेट पर कुछ सेंसरशिप लागू है - जिसमें यूट्यूब, गूगल अर्थ तथा लाइवजर्नल (एक प्रमुख ब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म)  पर प्रतिबंध प्रमुख हैं. एक अन्य समस्या है वो ये है कि पश्चिमी सहारा समस्याओं पर ब्लॉग लेखन पर सेंसरशिप - ये प्रतिबंध विरोध के दृष्टिकोणों को प्रसारित प्रचारित होने से रोकने के लिए लगाए गए हैं.</p></blockquote>
<p><strong>चिट्ठाकारी के अपने सबसे बेहतरीन पलों को साझा करना चाहेंगीं?</strong></p>
<blockquote><p>जब <a href="http://www.globalvoicesonline.org/2008/01/16/a-muslim-britney-spears/">ब्रिटनी स्पीयर्स</a> ने इस्लाम धर्म अपनाना चाहा? चलिए, ये तो मजाक था! चिट्ठाजगत् के मेरे यादगार पल वे हैं जब मैं मोरक्को में रहती थी और यूट्यूब जैसी साइटों पर प्रतिबंध लगाए जा रहे थे तब मैं मोरक्को मीडिया में छाई हुई थी. मैंने तब इस महत्वपूर्ण समाचार को बड़े समाचार साइटों से पहले अपने ब्लॉग पोस्ट के जरिए ब्रेक किया था.</p></blockquote>
<p><strong>आप अपना खाली समय कैसे गुजारती हैं? </strong></p>
<blockquote><p>जब भी वो मुझे मिलता है  (अब तो यदा कदा ही मिल पाता है ), तो मैं किताबें पढ़ती हूं. मैं अपना बहुत सारा समय (जाहिर है) ऑनलाइन गुजारती हूँ - पर वो किसी न किसी रूप में किसी न किसी कार्य से जुड़ा हुआ होता है.</p></blockquote>
<p><strong>आपकी पढ़ी ताजातरीन किताब कौन सी है? आप उसके बारे में कुछ हमें भी बताएंगीं ?</strong></p>
<blockquote><p>अभी मैं डेव ईगर की किताब &#8216;यू शैल नो योर वेलोसिटी!&#39; पढ़ रही हूं जो कि उनके संस्मरण - &#8216;अ हर्टब्रेकिंग वर्क ऑफ़ स्टैगरिंग जीनियस&#39; से बिलकुल अलग है. मैंने इस किताब को अभी पढ़ना शुरू ही किया है. परंतु एक बात मैं कहना चाहूंगी कि डेव ईगर का लेखन मुझे कई स्तरों पर प्रभावित करता है. खासतौर पर उनके अनुभाव (और करुणा) जो अगली पीढ़ी के लेखकों को वे देना चाहते हैं.</p></blockquote>
<p><strong>आमतौर पर आप किन विषयों पर चिट्ठा लिखती हैं ?</strong></p>
<blockquote><p>पिछले तीन वर्षों के दौरान मैंने मोरक्को के बारे में ( <a href="http://www.moroccosavvy.com/taamarbuuta"> द मोरक्को रिपोर्ट</a>) पर लिखा है. हालांकि बहुत सारा जो मैंने लिखा है वो मेरे अपने अनुभव व विचार हैं, पर मैंने बहुत से समाचारों की रपट व दुबारा रपट भी दी है. दूसरे चिट्ठाकारों के विचारों के बारे में भी लिखा है. मेरे  <a href="http://jilliancyork.com/">नए ब्लॉग </a> में  भिन्न विषय हैं . मोरक्को के बारे में तीन साल तक लिख चुकने के बाद मुझे लगा कि अब समय आ गया है कि कुछ और विषय लिया जाए. हालांकि मैं द मोरक्को रिपोर्ट में ब्लॉग लेखन जारी रखूंगी, मगर अब मैं बोस्टन में रहती हूं और मैं चाहती हूं कि उसकी कुछ झलक मेरी लेखनी से भी झलके.</p></blockquote>
<p><strong>मोरक्को तथा वहां के चिट्ठाजगत् से आपकी क्या आशाएं हैं?</strong></p>
<blockquote><p>मोरक्को एक अतुल्य देश है. पिछले 50 वर्षों में इस देश ने जो तकनालॉजी में विकास देखे हैं, वो कहीं और 100 वर्षों में भी संभव नहीं हो पाते. मोरक्को नवीनतम तकनालॉजी को विस्मयकारक तेजी से अपनाता है. पिछले सात-आठ वर्षों में इंटरनेट यहाँ एक बहुत बड़ी शक्ति बनकर उभरा है.  पिछले तीन वर्षों में सैकड़ों नए ब्लॉग और फ़ोरम बने हैं.  मैं जहां तक समझती हूं, कि सभी ब्लॉग महत्वपूर्ण हैं और खासकर ब्लॉगोमा, पर मैं चाहती हूं कि अधिक से अधिक मोरक्कोवासी इस माध्यम का प्रयोग महत्वपूर्ण विषयों पर वादविवाद हेतु करें.  दुर्भाग्य से वहां पर चिट्ठों को राजनीतिक प्लेटफ़ॉर्म के रूप में प्रयोग किए जाने के खतरे भी हैं (<a href="http://www.globalvoicesonline.org/2008/02/24/morocco-no-justice-for-fouad-mourtada/"> फोआद मोरतादा</a> के विरुद्ध हालिया प्रकरण के संदर्भ में ये सही भी प्रतीत होता है).</p></blockquote>
<p><strong>फरवरी में आपने 10 सदस्यीय जीवी कंटिन्जेंट टू <a href="http://ifocos.org/we-media-miami-2008/"> वीमीडिया</a> की सदस्यता ली. क्या आप हमें   <a href="http://www.caribbeanfreeradio.com/blog/2008/02/26/global-voices-bloggers-not-cause-of-power-outage-in-south-florida/"> जीवीओ हाउस</a> में अपने ठहरने के तथा अन्य जीवींअर्स के साथ रहने के अनुभवों के बारे में बता सकती हैं? आपका अनुभव क्या रहा? क्या आप अन्य जीवीअर्स से जल्द से जल्द मिलने को बेताब हैं? </strong></p>
<blockquote><p>वीमीडिया का अनुभव शानदार रहा!  अन्य जीवीअर्स से पहली मर्तबा मिलना अलौकिक अनुभव था&#8230; जब आप इंटरनेट की आभासी दुनिया में इतने सारे लोगों से नित्य मिलते हैं तो लगता है कि आप उन्हें अच्छे से जानते समझते हैं. वहां तो कई ऐसे भी मिले जिनसे मेरी कभी ऑनलाइन मुलाकातें भी नहीं थीं, और हम दोस्त बन गए. इस जून में बुडापेस्ट में होने जा रहे  <a href="http://summit08.globalvoicesonline.org/">जीवी समिट</a> का मुझे बेसब्री से इंतजार है.</p></blockquote>
<p><strong>कुछ अंतिम विचार?</strong></p>
<blockquote><p>मुझे खुशी है कि मैं ग्लोबल वाइसेज का एक हिस्सा हूं.  मैंने कोई साल भर पहले जीवी के लिए लिखना प्रारंभ किया था तो मुझे ये भान नहीं था कि मैं कितनी बड़ी संस्था से जुड़ रही हूं. पर अब मैं अपने उस निर्णय पर खुश हूं!</p></blockquote>
</div>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://hi.globalvoicesonline.org/blogger-of-the-week-jillian-york/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>3</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>अरबी : चिट्ठा-पाठकों की बारीकी से पड़ताल</title>
		<link>http://hi.globalvoicesonline.org/arabeyes-a-closer-look-at-readers/</link>
		<comments>http://hi.globalvoicesonline.org/arabeyes-a-closer-look-at-readers/#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 01 May 2008 12:25:19 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ravishankar Shrivastava</dc:creator>
				<category><![CDATA[Arts & Culture]]></category>
		<category><![CDATA[Bahrain]]></category>
		<category><![CDATA[Egypt]]></category>
		<category><![CDATA[English]]></category>
		<category><![CDATA[Gender]]></category>
		<category><![CDATA[Internet & Telecoms]]></category>
		<category><![CDATA[Lebanon]]></category>
		<category><![CDATA[Saudi Arabia]]></category>
		<category><![CDATA[Software & Tools]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://hi.globalvoicesonline.org/?p=156</guid>
		<description><![CDATA[मूल लेखक/लेखिकाअमीरा अल हुसैनी  &#183; अनुवादक Ravishankar Shrivastava &#183;  मूल प्रविष्टि देखें 
पिछले महीने बहुत से अरबी चिट्ठाकारों ने बारीकी से पड़ताल की कि उनके चिट्ठे कौन पढ़ते हैं और कहां से, कैसे, किस विधि से पढ़ने के लिए आते हैं. इस बारे में बहरीन, सऊदी अरब, लेबनान तथा मिस्र के चिट्ठाकारों का [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<em>मूल लेखक/लेखिका<a href="http://www.globalvoicesonline.org/author/amira-al-hussaini/">अमीरा अल हुसैनी</a>  &middot; अनुवादक <a href='http://hi.globalvoicesonline.org/author/ravishankar/'>Ravishankar Shrivastava</a> &middot;  <a href='http://www.globalvoicesonline.org/2008/05/01/arabeyes-a-closer-look-at-readers/'>मूल प्रविष्टि देखें</a></em> 
<br /><p>पिछले महीने बहुत से अरबी चिट्ठाकारों ने बारीकी से पड़ताल की कि उनके चिट्ठे कौन पढ़ते हैं और कहां से, कैसे, किस विधि से पढ़ने के लिए आते हैं. इस बारे में बहरीन, सऊदी अरब, लेबनान तथा मिस्र के चिट्ठाकारों का क्या कहना है यह हम इस छोटी सी समीक्षा में देखने की कोशिश करते हैं.</p>
<p><strong>बहरीन:</strong></p>
<p><em><a href="http://sillybahrainigirl.blogspot.com/2008/03/arab-perverts.html">सिली बहरीनी गर्ल</a></em> ने जब अपने चिट्ठे के पाठकों के आवाजाही आंकड़ों को देखा तो असभ्य अरबी लोगों पर वह एक तरह से अपने चिट्ठे पर बरस पड़ीं.<br />
वे स्पष्ट करती हैं:</p>
<blockquote><p>यह बात हम अरबी लोगों के लिए, जिसमें मैं भी शामिल हूं, वाकई शर्मनाक है कि हमें इंटरनेट की सुविधा मिली हुई है .</p>
<p>अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए व्यक्ति किसी बिल्ली को भी मार कर देख सकता है, परंतु यहाँ इंटरनेट पर तो स्थिति और भी गंभीर है. यहाँ तो लोगों की शब्दावलियाँ वास्तविक रंगीनियों से भरी हैं. मैंने सिर्फ ये देखने की कोशिश की कि लोग किन शब्दों को खोजते हुए मेरे चिट्ठे पर आते हैं, और परिणाम ये रहे. ये 250 शीर्ष के कुंजीशब्द हैं जिन्हें इंटरनेट सर्च पर प्रयोग कर पाठक मेरे चिट्ठे पर पहुँचे. इससे तो एक बारगी मुझे ऐसा लगने लगा  कि क्यों न मैं अपनी सेंडल उतार कर फेंक दूं और एक वैश्यालय खोल लूं. मैं आखिर चिट्ठाकारी क्यों कर रही हूं, चिट्ठाकारिता को क्यों प्रमोट कर रही हूं और लोगों को क्यों ये बताती फिरती हूं कि चिट्ठे उन्हें अपनी अभिव्यक्ति को प्रकट करने का शसक्त माध्यम प्रदान कर रहे हैं?</p></blockquote>
<p>इसके बाद वे उन 250 शब्दों की सूची प्रस्तुत करती हैं जिनके जरिए पाठक उनके चिट्ठे पर पहुँचे.</p>
<p><strong>सऊदी अरब : </strong></p>
<p>सऊदी अरब की  <em><a href="http://delhi4cats.wordpress.com/2008/03/13/blog-search-terms/"> अमरीकन बेदू</a></em> अपने चिट्ठे पर आने वाले पाठकों के बारे में अपने विचारों को कुछ यूं साझा करती हैं :</p>
<blockquote><p>सऊदी राज्य के दैनिंदनी अनुभवों को साझा करने के अतिरिक्त मैं अपने चिट्ठे पर शब्दों के जरिए सर्च कर आने वाले पाठकों पर भी ध्यान रखती हूं. ब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म के लिए वर्डप्रेस का प्रयोग करने वालों के लिए यह एक बहुत बड़ी सुविधा है, जिसे मेरे जैसे गैर तकनीकी लोग भी आसानी से प्रयोग और प्रबंधित कर सकते हैं. यह आपको आपके चिट्ठा पाठकों के दैनिक, साप्ताहिक, मासिक तथा वार्षिक आंकड़े देता है. इससे ये तो पता चलता ही है कि नित्य कितने पाठकों ने आपके चिट्ठे को पढ़ा बल्कि ये भी कि वे कौन सी पोस्टें पढ़ते हैं. जैसा कि मैंने शुरूआत में बताया है, मुझे नित्य के खोजे गए शब्दों की सूची भी मिलती है जिनके जरिए मेरे चिट्ठों पर पाठक पहुंचते हैं. इन शब्दों की समीक्षा करने पर कभी कभी मुझे ये लगता है कि जो शब्द पाठकों को आकर्षित कर रहे हैं और जिनके लिए वे खोजबीन कर रहे हैं उन पर पोस्ट लिखा जाना चाहिए तो मैं लिखती भी हूं. और कभी कभी किन्हीं खोजे गए शब्दों को देख कर  ये भी लगता है कि सर्च इंजिनों ने इन शब्दों में ऐसा क्या पाया कि उन्होंने पाठकों को मेरे चिट्ठे पर भेज दिया!</p></blockquote>
<p><strong>लेबनान: </strong></p>
<p>जब लेबनानी चिट्ठाकार <em><a href="http://rambleb.blogspot.com/2008/03/haifawehbesexpicture.html">एंटोउन</a></em> को यह पता चला कि उनके चिट्ठे के कोई 20 प्रतिशत पाठक लेबनानी पॉप स्टार  <a href="http://www.answers.com/Haifa+Wehbe?cat=entertainment">हाइफ़ा वेहबे</a> के ऊपर लिखे गए चिट्ठे के कारण आकर्षित हुए तो उन्होंने ईंट का जवाब पत्थर से देने की ठानी और अपने चिट्ठे पर लेबनान के हॉट स्टारों के और चित्रों को पोस्ट किया. वे स्पष्ट करते हैं:</p>
<blockquote><p>मैंने यह पाया है कि कम से कम 20 प्रतिशत हिट्स जो मेरे चिट्ठे को मिलते हैं वो कामुक व्यक्तियों   (पुरुषों, तथा कुछ मात्रा में स्त्रियों ) के होते हैं जो हाइफ़ा वेहबे के चित्रों के लिए सर्च करते हुए आते हैं. पिछले सप्ताह मैंने हाइफ़ा वेहबे तथा राजनीतिक इस्लाम के बारे में एक पोस्ट लिखा था. मैं आपको बताता हूँ कि इस चिट्ठे पर गूगल के जरिए खोज कर आने वाले इन कामुकों ने खोज के लिए किन शब्दों का प्रयोग किया था:</p>
<p>* हाइफ़ा वाहबी, सेक्स<br />
* f****d हाइफ़ा वेहबे के चित्र<br />
* हाइफ़ा के अच्छे फोटो<br />
* चित्र सेक्स हाइफ़ा</p>
<p>अब आपको अंदाजा हो गया होगा. तो फिर मैंने क्या किया. मैंने लेबनान और इसकी क्षेत्रीयता की समस्याओं के बारे में गंभीरता से चर्चा करने के बजाए अपने चिट्ठे पर मैंने हाइफ़ा के और ढेर सारे चित्र लोड कर दिए. मैंने  <a href="http://www.answers.com/Nancy+Ajram?cat=entertainment">नैंसी अजराम </a> तथा <a href="http://www.answers.com/topic/elissa-singer?cat=entertainment">एलिसा</a> के चित्र भी अपने चिट्ठे में टांग दिए. अब कम से कम हाइफ़ा+वेहबे+सेक्स ढूंढने वालों को मेरे चिट्ठे से निराश नहीं होना पड़ेगा. कभी कभी आपूर्ति भी आवश्यकता को न्यायोचित बनाती है. यदि मैं कुछ पाठकों को आकर्षित कर पाता हूं तो  संभवतः वे कुछ देर मेरे चिट्ठे पर रुकें, देखें और, ब्राउज़िंग के दौरान, हो सकता है एकाध गंभीर विषय को पढ़ भी लें.</p></blockquote>
<p><strong>मिस्र:</strong><br />
<em><br />
मिस्र के  <a href="http://www.whisperofmadness.com/2008/03/13/a-personal-favorite-maybe-a-classic/#comments"> डी बी शोब्रावे</a></em> ने भी पड़ताल किया  कि उनके चिट्ठे की कौन सी चीजें पाठकों को खींच लाती हैं. और जब उन्होंने पाया कि उनका अब तक का सबसे बढ़िया  ‘डेलिसियस&#39; पोस्ट लोगों की निगाहों में नहीं चढ़ा तो उन्होंने इसे फिर से प्रकाशित करने का निर्णय लिया<span style="font-style: italic;">. </span><em>शोब्रावे </em>अपने इस कदम को कुछ यूं स्पष्ट करते हैं:</p>
<blockquote><p>यदा कदा मैं अपने साइट के पाठकों के आवाजाही के आंकड़ों पर नजर मारता हूँ और यह समझने की कोशिश करता हूँ कि वे क्या पढ़ना चाहते हैं और वे किस विधि से मेरी साइट पर आए. आज मैंने देखा तो पाया कि ताजातरीन पोस्टों हमस तथा फालाफेल के युद्ध, हॉट मिस्री लड़कियाँ तथा हिलेरी क्लिंटन और बराक ओबामा के बारे में लिखे मेरे सभी पोस्टों को तो लोग पढ़ रहे हैं, परंतु मेरे पसंदीदा पोस्ट पर न तो सर्च इंजिन का और न ही लोगों का ध्यान गया है. और वह पोस्ट तो मेरा सबसे बढ़िया पोस्ट है, यह मैं कह सकता हूं. मैंने आज इसे फिर से पढ़ा तो लगा कि इसे किसी और ने लिखा है और यह वाकई लाजवाब है. तो मैं इसे फिर से पोस्ट कर रहा हूँ ताकि जिनसे छूट गया हो वे पढ़ सकें.</p></blockquote>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://hi.globalvoicesonline.org/arabeyes-a-closer-look-at-readers/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>2</slash:comments>
		</item>
	</channel>
</rss>
