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	<title>ग्लोबल वायसेज़ हिन्दी में &#187; Internet &#038; Telecoms</title>
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	<description>पृथ्वी बातें कर रही है। क्या आप सुन रहे हैं?</description>
	<pubDate>Sun, 16 Nov 2008 09:59:40 +0000</pubDate>
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			<title>ग्लोबल वायसेज़ हिन्दी में</title>
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		<title>मिस्र : गूगल ब्लॉगर ने नवारा के ब्लॉग को प्रतिबंधित किया</title>
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		<pubDate>Sun, 16 Nov 2008 09:59:40 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[प्रतीत होता है कि आम जनता के ब्लॉगों पर प्रतिबंध लगाना सिर्फ तीसरी दुनिया के  सरकारों की ही बपौती नहीं रह गई है.   गूगल का ब्लॉगस्पॉट भी इस बैंडबाजे में शामिल  हो गया लगता है, और वो भी धूमधड़ाके से. गूगल ब्लॉगस्पॉट ने नवारा नेगम के  ब्लॉग  (तहयीज [अर.]), पर बिना कारण  बताए प्रतिबंध लगा दिया. अहमद शोकीर इस बारे [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>प्रतीत होता है कि आम जनता के ब्लॉगों पर प्रतिबंध लगाना सिर्फ तीसरी दुनिया के  सरकारों की ही बपौती नहीं रह गई है.   गूगल का ब्लॉगस्पॉट भी इस बैंडबाजे में शामिल  हो गया लगता है, और वो भी धूमधड़ाके से. गूगल ब्लॉगस्पॉट ने नवारा नेगम के  ब्लॉग  (<a href="http://tahyyes.blogspot.com/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/tahyyes.blogspot.com');">तहयीज [अर.]</a>), पर बिना कारण  बताए प्रतिबंध लगा दिया. <a href="http://shokeir.blogspot.com/2008/11/blog-post_15.html" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/shokeir.blogspot.com');">अहमद शोकीर</a> इस बारे में विस्तार से लिखते हैं:</p>
<div class="arabic">مع الساعات الأخيرة من الليل وبينما الكل يتأهب للذهاب للفراش ،  فوجئ مجتمع المدونين على الجايكو بخبر غير متوقع صطدم الجميع … وهو تعليق مدونة  نوارة نجم الشهيرة بجبهة التهييس الشعبية … لمخالفتها شروط الإستخدام حسب تعبير  البلوجر</div>
<div class="translation">तमाम चिट्ठाकार जब रात को सोने जा रहे थे तो उन्हें  <a href="http://tafatefo.jaiku.com/presence/48940548#c-1801244" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/tafatefo.jaiku.com');">जायकू</a> के  जरिए आश्चर्यचकित करने वाला संदेश मिला जिसमें बताया गया था कि नवारा नेगम के ब्लॉग  [गभेत अल तहयीज अल शबेया] पर गूगल ने प्रतिबंध लगा दिया है चूंकि वहां गूगल ब्लॉगर  की सेवा शर्तों का उल्लंघन किया जा रहा था.</div>
<div class="arabic">نوارة … وطبقا لإحصائيات جوجل ريدر تنشر أربعة وعشرون وسبعة من  عشر تدوينة في الإسبوع أي مايزيد عن أكثر من ثلاث تدوينات ونصف يومياً .. مَن مِن  البشر يستطيع أن ينشر هذا الكم من التدوينات التي تحمل رأي وفكر وتحليل ؟ ، تدوينات  نوارة بلاشك مدرسة خاصة في الكتابة حملت أسلوباً مبتكراً وجديداً في الكتابة  العامية لا يجيده أحد سواها</div>
<div class="translation">नवारा … गूगल रीडर के आंकड़ों को मानें तो इस ब्लॉग पर  प्रति सप्ताह 24.7 ब्लॉग पोस्टें याने कि कोई 3.5 पोस्टें प्रतिदिन प्रकाशित हो रही  थीं. नवारा के अलावा और कौन इतनी संख्या में लाजवाब, विश्लेषणों और नए विचारों से  भरपूर पोस्टें प्रकाशित कर सकता है भला?  ? नवारा के पास अपनी अलग, विशिष्ट शैली है  जिसमें वो गैर-पारंपरिक अरबी अपभाषा [स्लैंग] का भरपूर प्रयोग करती रही हैं.</div>
<div class="arabic">أتوقع أن مدونتها سوف تعود في خلال أيام قليلة بعد مراجعة بلوجر  لها ورفع التعليق ، فلايوجد في مدونتها مايخرق بأي شكل من الأشكال شروط بلوجر ،  ولكن حتى العودة يظل الجميع متشككاً في عودتها</div>
<div class="translation">मुझे उम्मीद है कि उनका ब्लॉग यथा शीघ्र वापस आ जाएगा –  ब्लॉगर पूरी जांच पड़ताल कर ले – उसे नवारा के लिखे में कुछ भी ऐसा नहीं मिलेगा जो  गूगल-ब्लॉगर की सेवा शर्तों का उल्लंघन करता हो. परंतु तब तक के लिए हममें से हर  किसी के मन में नवारा के ब्लॉग की वापसी का संदेह तो बना  ही रहेगा.</div>
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		<title>भारत : वीडियो स्वयंसेवकों के जरिए सामुदायिक पत्रकारिता</title>
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		<pubDate>Tue, 14 Oct 2008 08:02:51 +0000</pubDate>
		<dc:creator>raviratlami</dc:creator>
		
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		<description><![CDATA[
भारत के गांवों और झुग्गी झोपड़ियों में रहने वालों की एक गैरलाभकारी संस्था ‘वीडियो स्वयंसेवक’ (वीडियो वालंटियर्स) है. यह संस्था उस तरह की वीडियो सामग्री बनाती है जो सीधे-सीधे उनके सामाजिक सारोकारों को प्रभावित करते हैं. सामाजिक समस्या उठाने वाले समाचार व घटना प्रधान वीडियो को यह संस्था समुदाय के हजारों लाखों लोगों के बीच [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div id="single" class="entry">
<p>भारत के गांवों और झुग्गी झोपड़ियों में रहने वालों की एक गैरलाभकारी संस्था <strong>‘वीडियो स्वयंसेवक’</strong> (वीडियो वालंटियर्स) है. यह संस्था उस तरह की वीडियो सामग्री बनाती है जो सीधे-सीधे उनके सामाजिक सारोकारों को प्रभावित करते हैं. सामाजिक समस्या उठाने वाले समाचार व घटना प्रधान वीडियो को यह संस्था समुदाय के हजारों लाखों लोगों के बीच प्रदर्शित करती है, जिससे जन जागृति होती है और लोगों में कुछ कर गुजरने की भावना उभरती है.&#160; सामुदायिक वीडियो सामग्री जिसे सामुदायिक वीडियो स्वयंसेवकों द्वारा ही आमतौर पर तैयार किया जाता है, उसे प्रभावी तरीके से जन जन तक पहुँचाने का प्रयास ऑनलाइन वीडियो चैनल <a href="http://www.ch19.org/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.ch19.org');">चैनल 19 </a>द्वारा बखूबी किया जा रहा है. </p>
<p>वीडियो स्वयंसेवकों द्वारा प्रस्तुत नीचे दिए गए ताजातरीन वीडियो में विश्व की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती धारावी में हड़ताल के बारे में हालात दर्ज हैं. इस हड़ताल के पीछे शासन का वह निर्णय है जिसके तहत प्रत्येक झुग्गीवासी को प्रति परिवार 400 वर्गफुट जमीन देने के पूर्व के वायदे से पलटकर अब सिर्फ 300 वर्गफुट जमीन दी जा रही है.&#160; <a href="http://mx.youtube.com/watch?v=hlf8cZICJuk" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/mx.youtube.com');">ब्लैक डे इन धारावी</a>&#160; नाम के इस वीडियो में पूरी कहानी दर्ज है. जाहिर है, इस वीडियो को भी स्वयंसेवकों ने ही बनाया है:</p>
<p><object><embed src="http://www.youtube.com/v/hlf8cZICJuk&amp;hl=en&amp;fs=1" type="application/x-shockwave-flash" allowfullscreen="true" width="425" height="344"></object></p>
<p>वीडियो स्वयंसेवकों द्वारा चैनल 19 के लिए बनाए गए अन्य वीडियो भी गहरी अंतर्दृष्टि युक्त व प्रेरक बन पड़े हैं.&#160; <a href="http://mx.youtube.com/watch?v=YJa4Q18DiHc" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/mx.youtube.com');">वीमन कैन प्ले टू !</a>&#160; नाम के वीडियो में सामुदायिक पत्रकारों ने&#160; झुग्गीवासियों से प्रश्न पूछा कि बच्चे यहाँ किस तरह खेल पाते हैं. पता चला कि लड़के तो भले ही खेल कूद लेते हैं, परंतु लड़कियाँ चौका-बर्तन में ही लगी रहती हैं. तो उन्होंने एक क्रिकेट खिलाड़िन से खेल के महत्व के बारे में बातचीत दर्ज की जिससे लड़कियों को भी खेल के महत्व के बारे में बताया जा सके, और वे भी कुछ प्रेरणा ले सकें. ऐसे ही एक अन्य वीडियो <a href="http://mx.youtube.com/watch?v=Q5s7MUvICNM" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/mx.youtube.com');">नेवर टू लेट टू टीच </a>में कचरा बीनने वाली एक स्त्री की कहानी है जिसने अपना भविष्य बदलने का निर्णय किया और शिक्षिका बनने के लिए पढ़ना शुरू कर दिया. </p>
</div>
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		<title>भारत : चिट्ठा चोरी के बाद धमकी, धौंसपट्टी और सीनाजोरी</title>
		<link>http://hi.globalvoicesonline.org/india-bullying-bloggers-stealing-content-and-threats/</link>
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		<pubDate>Wed, 11 Jun 2008 10:32:04 +0000</pubDate>
		<dc:creator>raviratlami</dc:creator>
		
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		<description><![CDATA[जाल जगत् में चिट्ठाकार एक तरह से असुरक्षित ही बने रहते हैं. अनाम या छद्म नामधारी होने के बावजूद मिलने वाली धमकियाँ ये सिद्ध करती हैं कि कोई चिट्ठा कितना महत्वपूर्ण हो सकता है. इंजी पेन्नु तथा केरल्स.कॉम के प्रकरण ने चिट्ठासंसार में तूफ़ान सा मचा दिया है. केरल तथा मलयाली भाषा पर आधारित केरल्स.कॉम [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>जाल जगत् में चिट्ठाकार एक तरह से असुरक्षित ही बने रहते हैं. अनाम या छद्म नामधारी होने के बावजूद मिलने वाली धमकियाँ ये सिद्ध करती हैं कि कोई चिट्ठा कितना महत्वपूर्ण हो सकता है. इंजी पेन्नु तथा केरल्स.कॉम के प्रकरण ने चिट्ठासंसार में तूफ़ान सा मचा दिया है. केरल तथा मलयाली भाषा पर आधारित केरल्स.कॉम ने एक चिट्ठाकारा को डराने व धमकाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. चिट्ठाकारा इंजी पेन्नु जो  <em><a href="http://myinjimanga.blogspot.com/2008/06/stealing-threat-cyber-stalking-abuse.html" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/myinjimanga.blogspot.com');">जिंजर एंड मैंगो</a></em> नाम का चिट्ठा लिखती हैं, ने केरल्स.कॉम से बड़े ही नम्रता पूर्वक निवेदन किया कि उनके चिट्ठे से चोरी कर उठाई गई सामग्री को केरल्स.कॉम से हटा दिया जाए. बाद में इंजी ने केरल्स.कॉम के अनपेक्षित प्रत्युत्तर का विरोध किया. इंजी तथा केरल्स.कॉम के बीच हुए पत्राचार के प्रकाशित होने पर इंजी के चिट्ठा पाठकों की आक्रोषित प्रतिक्रियाएं रहीं. चिट्ठों से सामग्री चोरी की घटनाएं नई नहीं हैं, परंतु जिस साइट ने सामग्री चोरी की, उसके द्वारा सीना जोरी किया जाना, धमकियाँ दिया जाना, धौंसपट्टी जमाना – ये जरूर कुछ अलहदा सा रहा.</p>
<div id="full-article">
<div class="post">
<div id="single" class="entry">
<blockquote><p>फिर उसके बाद धमकियों, दुर्व्यव्हार और नक़ली कानूनी नोटिस का दौर चला. केरल्स.कॉम के इन गलत कार्यों की आलोचना करने वाले पोस्टों को हटाने के लिए उन्होंने चिट्ठाकारों को आदेशित करना शुरू कर दिया. यह तो सचमुच पागलपन था – चिट्ठाकारों को इस तरह आदेशित करना. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के क्या यही मायने हैं?…..</p>
<p>इसके बाद श्री शिव कुमार ने मुझे मेरे बोलने की सजा के तौर पर शारीरिक क्षति पहुँचाने की धमकी दी. उन्होंने अपने अगले ईमेल में कहा कि वो मेरे जैसे लोगों के लिए अप्रत्याशित, अनपेक्षित वार करना जानते हैं.</p></blockquote>
<p><em><a href="http://shabdashilp.blogspot.com/2008/06/support-to-inji-pouring-from-hindi.html" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/shabdashilp.blogspot.com');">हिन्दी ब्लॉग रिपोर्टर</a></em> ने लिखा</p>
<blockquote><p>अपने ताजातरीन पोस्ट में उन्होंने साइबर उद्योग के इस पुरातन समूह से प्राप्त धमकी भरे ईमेल के उदाहरण दिए. संक्षिप्त से शोध के उपरांत इंजी को ज्ञात हुआ कि यह समूह  पॉर्न साइट तो चलाता ही है, साथ ही अनाथों के लिये कुछ दान दक्षिणाएँ भी मुहैया कराता है.</p></blockquote>
<p>यह भी पता चला कि केरल्स.कॉम ने अन्य चिट्ठों से भी सामग्रियों की चोरी की और उनके नाम से प्रकाशित कर दिया जबकि उन्होंने ये सामग्रियाँ लिखी ही नहीं थीं.  <em><a href="http://jrajansblog.blogspot.com/2008/06/protest-against-content-theft-and.html" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/jrajansblog.blogspot.com');">जयरंजन्स ब्लॉग</a></em> ने लिखा</p>
<blockquote><p>केरल्स.कॉम द्वारा मलयालम चिट्ठों से सामग्री की चोरी की मैं तीखे शब्दों में भर्त्सना करता हूं. इसके अलावा, केरल्स.कॉम की सपोर्ट टीम ने उन साथी चिट्ठाकारों, जिन्होंने इस घृणास्पद कार्य की निंदा की, उन्हें धमकाया व उनसे दुर्व्यव्हार किया और, जैसे कि यह काफी नहीं था, उन्होंने साइबरशिकार जैसे प्रयास भी किए.</p></blockquote>
<p><a href="http://kakkat.blogspot.com/2008/05/content-theft-by-keralscom.html" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/kakkat.blogspot.com');">तुलसी </a> ने कुछ गहरी छानबीन की, और लिखा</p>
<blockquote><p>हाल ही में मैंने नोट किया कि माझाथल्ली.कॉम ने कॉपीराइट का उल्लंघन किया है. उन्होंने मेरे इस चिट्ठे से बगैर मेरी अनुमति या लिखित सहमति के अथवा बगैर मुझे श्रेय दिए, मेरे फोटोग्राफों को नक़ल किया. यही नहीं, उन्होंने मेरे उन चित्रों में केरल्स.कॉम का वाटरमार्क भी लगा दिया. इसके बाद मैंने आगे की जांच पड़ताल की तो पाया कि यो दोनों साइटें एक ही कंपनी – <strong>अनश्वर कंपनी प्रा. लि</strong>. की संपत्ति हैं. मुझे यह जानकर धक्का लगा कि वह व्यक्ति जिसने मेरे चित्रों की नक़ल की थी, उसमें अपने नाम व अपनी कंपनी  के नाम का वाटरमार्क लगाया, वो कोई और नहीं, बल्कि केरल्स.कॉम का सीईओ है.</p></blockquote>
<p><a href="http://saptavarnangal.blogspot.com/2008/06/keralscom-boologam-malayalam.html" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/saptavarnangal.blogspot.com');">सप्तवरंगल</a> ने इस विवाद का विस्तृत खाका खींचा कि घटनाएं तरतीबवार किस तरह होती रहीं. उन्होंने इसी समूह के अन्य जाल स्थलों के बारे में भी कुछ पड़ताल की.</p>
<blockquote><p>जैसा कि अब हम सबको पता है, केरल्स.कॉम पोर्टल के मलयालम खंड में भरने के लिए बहुत से मलयालम चिट्ठों से सामग्री चुराई गई. इसके बारे में सबसे पहले साजी ने बताया, और फिर उसके बाद जब बहुत से चिट्ठाकारों ने बताना शुरू किया तो केरल्स.कॉम द्वारा सामग्री चोरी के विस्तार का पता चला. एक अन्य साइट http://www.mazhathully.com/ ने तुलसी तथा कुमार के फोटोब्लॉग से फोटो चुराए.( मैंने केरल्स.कॉम के जरिए एक शुभकामना संदेश कुमार को भेजा था तो उसे देखते ही कुमार ने कहा कि यह फोटो उनके फोटो ब्लॉग में प्रकाशित है और बिना अनुमति के प्रयोग किया गया है. फिर उन्होंने केरल्स.कॉम को इस फोटो को हटाने के लिए लिखा.) केरल्स.कॉम तथा माझाथल्ली.कॉम एक ही ( गोडैडी.कॉम जाँच) कंपनी ‘अनश्वर ग्रुप ऑफ कंपनी प्रा. लि.&#39; के हैं जो कि अमरीका तथा भारत के नक़ली पता का इस्तेमाल कर रहे हैं. जब मैंने आज जांच पड़ताल की तो पाया कि  http://www.mazhathully.com/ साइट अभी निलंबित स्थिति में है.</p></blockquote>
<p><em><a href="http://nalanz.wordpress.com/2008/06/07/keralscom-turns-out-be-mafialand/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/nalanz.wordpress.com');">द ब्रीज</a></em> ने उल्लेख किया कि केरल्स.कॉम के एक प्रतिनिधि ने इंजी पेन्नु का नाम घसीटा और एक नक़ली वेबसाइट तैयार किया.</p>
</div>
</div>
</div>
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		<title>इस सप्ताह की चिट्ठाकारा : जिलियन यॉर्क</title>
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		<pubDate>Thu, 22 May 2008 08:12:28 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[

सप्ताह के चिट्ठाकार में आज मोरक्को की लेखिका  जिलियन सी यॉर्क  से बातें करते हैं जो कि  वाइसेज विदाउट वोट्स  में भी नियमित लिखती रही हैं.  मेकेन्स, मोरक्को में दो साल बिताने के बाद वर्तमान में बोस्टन, अमरीका में निवास कर रहीं जिलियन स्वतंत्र लेखिका हैं, चिट्ठाकारा हैं तथा मोरक्को [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div id="single" class="entry">
<p><img src="http://www.globalvoicesonline.org/wp-content/uploads/2008/05/jillian.jpg" alt="Jillian York" /></p>
<p>सप्ताह के चिट्ठाकार में आज मोरक्को की लेखिका  <a href="http://www.globalvoicesonline.org/author/jillian-york/"><em>जिलियन सी यॉर्क </em></a> से बातें करते हैं जो कि <em><a href="http://voiceswithoutvotes.org/author/jillian-york/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/voiceswithoutvotes.org');"><em> वाइसेज विदाउट वोट्स </em></a></em> में भी नियमित लिखती रही हैं.  मेकेन्स, मोरक्को में दो साल बिताने के बाद वर्तमान में बोस्टन, अमरीका में निवास कर रहीं जिलियन स्वतंत्र लेखिका हैं, चिट्ठाकारा हैं तथा मोरक्को गाइड बुक की लेखिका भी हैं. वे अपने <a href="http://jilliancyork.com/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/jilliancyork.com');">ब्लॉग</a> में नियमित लिखती रही हैं. लेखन, राजनीति, संगीत, सामाजिक सक्रियता तथा निवासी पत्रकारों (सिटिजन जर्नलिस्ट) के लेखन को पहचान प्रदान करना उनके पसंदीदा विषय रहे हैं. यह रहा जिलियन से लिया गया साक्षात्कार - जिससे आप उनके बारे में बहुत कुछ और जान सकेंगे:</p>
<p><strong>आपकी शैक्षणिक पृष्भूमि क्या है? </strong></p>
<blockquote><p>मैंने अमरीका के बिंघमटन विश्वविद्यालय से एक अतिरिक्त विषय नाट्यशास्त्र के साथ, समाजशास्त्र में स्नातक उपाधि प्राप्त की है.  मैंने समाजशास्त्र में अपनी पढ़ाई मध्यपूर्व तथा उत्तरी अफ्रीक्री देशों पर केंद्रित की थी तथा अपना शोधग्रंथ &#8216;अमरीकी मीडिया में अरबी लोगों के प्रति दृष्टिकोण&#39; विषय पर पूरा किया. मेरी पढ़ाई के विषय ने मुझे मोरक्को को करीब से देखने का मौका दिया.  मैंने अल अखवायन विश्वविद्यालय में ग्रीष्मकालीन अरबी कार्यक्रम में भी हिस्ला लिया था और अमरीका वापस आने के बाद अगले वर्ष वहाँ वापस जाने की कोशिशें जारी रही थीं.</p></blockquote>
<p><strong>आपकी आजीविका क्या है? </strong></p>
<blockquote><p>मैं अभी अपने अंतिम लक्ष्य - पूर्णकालिक लेखिका बनने हेतु प्रयासरत हूं.  मोरक्को पहुंचने के थोड़े ही समय के बाद मैंने &#8216;कल्चर स्मार्ट! मोरक्को&#39; (रेंडम हाउस, 2006) लिखा और फिर तब से ढेरों आलेख लिखे. हाल ही में, मुझे मोरक्को में दो वर्ष के लिए अंग्रेजी पढ़ाने का अवसर भी मिला था जो मेरी अब तक की आजीविकाओं में सर्वाधिक आनंददायी रहा था!</p></blockquote>
<p><strong> जिलियन यॉर्क कौन है ? कौन सी चीजें आपको आकर्षित करती हैं और किन चीजों से आपको चिढ़ मचती है ?</strong></p>
<blockquote><p>निश्चित रूप से मैं &#8216;टाइप ए&#39; क़िस्म की व्यक्ति हूं जो अधिक से अधिक काम करने में विश्वास रखते हुए हमेशा व्यस्त रहते हैं. मुझे चिट्ठाकारी व नया मीडिया आकर्षित करता है - मैं पहली चिट्ठाकारा थी जिसने मोरक्को के बारे में अंग्रेजी में पहली मर्तबा लिखा. और जब मैं मोरक्को में थी तो मैंने उदीयमान होते ब्लोगोमा (मोरक्को चिट्ठाजगत्) को देखा जो अब तेजी से पैर पसार रहा है. चिट्ठाकारी एक ऐसा चकित कर देने वाला माध्यम है जो एक साधारण व्यक्ति को भी अपने मन की बात सबके सामने बिना किसी परेशानी के रख देने की सुविधा तो देता ही है,  हम सभी को विभिन्न सांस्कृतिक ढांचों के बारे में जानने समझने का बेहतरीन माध्यम भी प्रदान करता है (तब भी जब हम एक दूसरे के लिए अधिक अजूबे न हों!). और, जहाँ तक उन चीजों के बारे में, जिनसे मुझे चिढ़ है - तो वे भी बहुत सी हैं, परंतु यदि अभी की बात लें तो वो है पूर्वग्रह ग्रस्त अमरीकी मीडिया.  कोई भी अमरीकी जो अमरीका से बाहर हफ़्ता दो हफ़्ता भी गुजार आता है वो ये समझ सकता है कि मुझे कैसा महसूस होता होगा.  विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता के मामले में मोरक्को कोई गढ़ तो नहीं है, परंतु वहां पर वैश्विक समाचारों पर आपकी पहुँच यहाँ अमरीका से कहीं ज्यादा बेहतर है.</p></blockquote>
<p><strong>आप कितने समय से चिट्ठाकारी कर रही हैं और क्यों?</strong></p>
<blockquote><p>मैंने 2005 में चिट्ठा लेखन प्रारंभ किया - तब, जब मैं मोरक्को पहली मर्तबा गई थी और तब से मैं अपने उस गोद लिए देश मोरक्को के बारे में लिखती आ रही हूं. पिछले अगस्त में अमरीका वापस आने के बाद भी.</p></blockquote>
<p><strong>आप जीवीओ की सदस्या कब से हैं और क्यों?</strong></p>
<blockquote><p>अप्रैल 2006 से - मैं उगते बढ़ते मोरक्को ब्लॉगमा में ज्यादा से ज्यादा शामिल होना चाहती थी और इसी कारण मैंने जीवीओ के क्षेत्रीय मध्य-पूर्व व उत्तरी अफ्रीकी संपादक अमीरा अल हुसैनी से संपर्क किया. और फिर, बाकी का सारा तो इतिहास में दर्ज हो चुका है.</p></blockquote>
<p><strong>आपके अपने ब्लॉगजगत् को कौन सी चीजें प्रभावित करती हैं ?</strong></p>
<blockquote><p>मोरक्को ब्लॉगोमा के साथ ये सौभाग्य है कि यहाँ के लेखक मनमर्जी के विषय चुनने के लिए पूरे स्वतंत्र हैं.  दुर्भाग्यवश, मोरक्को में भी इंटरनेट पर कुछ सेंसरशिप लागू है - जिसमें यूट्यूब, गूगल अर्थ तथा लाइवजर्नल (एक प्रमुख ब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म)  पर प्रतिबंध प्रमुख हैं. एक अन्य समस्या है वो ये है कि पश्चिमी सहारा समस्याओं पर ब्लॉग लेखन पर सेंसरशिप - ये प्रतिबंध विरोध के दृष्टिकोणों को प्रसारित प्रचारित होने से रोकने के लिए लगाए गए हैं.</p></blockquote>
<p><strong>चिट्ठाकारी के अपने सबसे बेहतरीन पलों को साझा करना चाहेंगीं?</strong></p>
<blockquote><p>जब <a href="http://www.globalvoicesonline.org/2008/01/16/a-muslim-britney-spears/">ब्रिटनी स्पीयर्स</a> ने इस्लाम धर्म अपनाना चाहा? चलिए, ये तो मजाक था! चिट्ठाजगत् के मेरे यादगार पल वे हैं जब मैं मोरक्को में रहती थी और यूट्यूब जैसी साइटों पर प्रतिबंध लगाए जा रहे थे तब मैं मोरक्को मीडिया में छाई हुई थी. मैंने तब इस महत्वपूर्ण समाचार को बड़े समाचार साइटों से पहले अपने ब्लॉग पोस्ट के जरिए ब्रेक किया था.</p></blockquote>
<p><strong>आप अपना खाली समय कैसे गुजारती हैं? </strong></p>
<blockquote><p>जब भी वो मुझे मिलता है  (अब तो यदा कदा ही मिल पाता है ), तो मैं किताबें पढ़ती हूं. मैं अपना बहुत सारा समय (जाहिर है) ऑनलाइन गुजारती हूँ - पर वो किसी न किसी रूप में किसी न किसी कार्य से जुड़ा हुआ होता है.</p></blockquote>
<p><strong>आपकी पढ़ी ताजातरीन किताब कौन सी है? आप उसके बारे में कुछ हमें भी बताएंगीं ?</strong></p>
<blockquote><p>अभी मैं डेव ईगर की किताब &#8216;यू शैल नो योर वेलोसिटी!&#39; पढ़ रही हूं जो कि उनके संस्मरण - &#8216;अ हर्टब्रेकिंग वर्क ऑफ़ स्टैगरिंग जीनियस&#39; से बिलकुल अलग है. मैंने इस किताब को अभी पढ़ना शुरू ही किया है. परंतु एक बात मैं कहना चाहूंगी कि डेव ईगर का लेखन मुझे कई स्तरों पर प्रभावित करता है. खासतौर पर उनके अनुभाव (और करुणा) जो अगली पीढ़ी के लेखकों को वे देना चाहते हैं.</p></blockquote>
<p><strong>आमतौर पर आप किन विषयों पर चिट्ठा लिखती हैं ?</strong></p>
<blockquote><p>पिछले तीन वर्षों के दौरान मैंने मोरक्को के बारे में ( <a href="http://www.moroccosavvy.com/taamarbuuta" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.moroccosavvy.com');"> द मोरक्को रिपोर्ट</a>) पर लिखा है. हालांकि बहुत सारा जो मैंने लिखा है वो मेरे अपने अनुभव व विचार हैं, पर मैंने बहुत से समाचारों की रपट व दुबारा रपट भी दी है. दूसरे चिट्ठाकारों के विचारों के बारे में भी लिखा है. मेरे  <a href="http://jilliancyork.com/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/jilliancyork.com');">नए ब्लॉग </a> में  भिन्न विषय हैं . मोरक्को के बारे में तीन साल तक लिख चुकने के बाद मुझे लगा कि अब समय आ गया है कि कुछ और विषय लिया जाए. हालांकि मैं द मोरक्को रिपोर्ट में ब्लॉग लेखन जारी रखूंगी, मगर अब मैं बोस्टन में रहती हूं और मैं चाहती हूं कि उसकी कुछ झलक मेरी लेखनी से भी झलके.</p></blockquote>
<p><strong>मोरक्को तथा वहां के चिट्ठाजगत् से आपकी क्या आशाएं हैं?</strong></p>
<blockquote><p>मोरक्को एक अतुल्य देश है. पिछले 50 वर्षों में इस देश ने जो तकनालॉजी में विकास देखे हैं, वो कहीं और 100 वर्षों में भी संभव नहीं हो पाते. मोरक्को नवीनतम तकनालॉजी को विस्मयकारक तेजी से अपनाता है. पिछले सात-आठ वर्षों में इंटरनेट यहाँ एक बहुत बड़ी शक्ति बनकर उभरा है.  पिछले तीन वर्षों में सैकड़ों नए ब्लॉग और फ़ोरम बने हैं.  मैं जहां तक समझती हूं, कि सभी ब्लॉग महत्वपूर्ण हैं और खासकर ब्लॉगोमा, पर मैं चाहती हूं कि अधिक से अधिक मोरक्कोवासी इस माध्यम का प्रयोग महत्वपूर्ण विषयों पर वादविवाद हेतु करें.  दुर्भाग्य से वहां पर चिट्ठों को राजनीतिक प्लेटफ़ॉर्म के रूप में प्रयोग किए जाने के खतरे भी हैं (<a href="http://www.globalvoicesonline.org/2008/02/24/morocco-no-justice-for-fouad-mourtada/"> फोआद मोरतादा</a> के विरुद्ध हालिया प्रकरण के संदर्भ में ये सही भी प्रतीत होता है).</p></blockquote>
<p><strong>फरवरी में आपने 10 सदस्यीय जीवी कंटिन्जेंट टू <a href="http://ifocos.org/we-media-miami-2008/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/ifocos.org');"> वीमीडिया</a> की सदस्यता ली. क्या आप हमें   <a href="http://www.caribbeanfreeradio.com/blog/2008/02/26/global-voices-bloggers-not-cause-of-power-outage-in-south-florida/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.caribbeanfreeradio.com');"> जीवीओ हाउस</a> में अपने ठहरने के तथा अन्य जीवींअर्स के साथ रहने के अनुभवों के बारे में बता सकती हैं? आपका अनुभव क्या रहा? क्या आप अन्य जीवीअर्स से जल्द से जल्द मिलने को बेताब हैं? </strong></p>
<blockquote><p>वीमीडिया का अनुभव शानदार रहा!  अन्य जीवीअर्स से पहली मर्तबा मिलना अलौकिक अनुभव था&#8230; जब आप इंटरनेट की आभासी दुनिया में इतने सारे लोगों से नित्य मिलते हैं तो लगता है कि आप उन्हें अच्छे से जानते समझते हैं. वहां तो कई ऐसे भी मिले जिनसे मेरी कभी ऑनलाइन मुलाकातें भी नहीं थीं, और हम दोस्त बन गए. इस जून में बुडापेस्ट में होने जा रहे  <a href="http://summit08.globalvoicesonline.org/">जीवी समिट</a> का मुझे बेसब्री से इंतजार है.</p></blockquote>
<p><strong>कुछ अंतिम विचार?</strong></p>
<blockquote><p>मुझे खुशी है कि मैं ग्लोबल वाइसेज का एक हिस्सा हूं.  मैंने कोई साल भर पहले जीवी के लिए लिखना प्रारंभ किया था तो मुझे ये भान नहीं था कि मैं कितनी बड़ी संस्था से जुड़ रही हूं. पर अब मैं अपने उस निर्णय पर खुश हूं!</p></blockquote>
</div>
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		</item>
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		<title>अरबी : चिट्ठा-पाठकों की बारीकी से पड़ताल</title>
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		<pubDate>Thu, 01 May 2008 12:25:19 +0000</pubDate>
		<dc:creator>raviratlami</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[Arts &#038; Culture]]></category>

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		<description><![CDATA[पिछले महीने बहुत से अरबी चिट्ठाकारों ने बारीकी से पड़ताल की कि उनके चिट्ठे कौन पढ़ते हैं और कहां से, कैसे, किस विधि से पढ़ने के लिए आते हैं. इस बारे में बहरीन, सऊदी अरब, लेबनान तथा मिस्र के चिट्ठाकारों का क्या कहना है यह हम इस छोटी सी समीक्षा में देखने की कोशिश करते [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>पिछले महीने बहुत से अरबी चिट्ठाकारों ने बारीकी से पड़ताल की कि उनके चिट्ठे कौन पढ़ते हैं और कहां से, कैसे, किस विधि से पढ़ने के लिए आते हैं. इस बारे में बहरीन, सऊदी अरब, लेबनान तथा मिस्र के चिट्ठाकारों का क्या कहना है यह हम इस छोटी सी समीक्षा में देखने की कोशिश करते हैं.</p>
<p><strong>बहरीन:</strong></p>
<p><em><a href="http://sillybahrainigirl.blogspot.com/2008/03/arab-perverts.html" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/sillybahrainigirl.blogspot.com');">सिली बहरीनी गर्ल</a></em> ने जब अपने चिट्ठे के पाठकों के आवाजाही आंकड़ों को देखा तो असभ्य अरबी लोगों पर वह एक तरह से अपने चिट्ठे पर बरस पड़ीं.<br />
वे स्पष्ट करती हैं:</p>
<blockquote><p>यह बात हम अरबी लोगों के लिए, जिसमें मैं भी शामिल हूं, वाकई शर्मनाक है कि हमें इंटरनेट की सुविधा मिली हुई है .</p>
<p>अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए व्यक्ति किसी बिल्ली को भी मार कर देख सकता है, परंतु यहाँ इंटरनेट पर तो स्थिति और भी गंभीर है. यहाँ तो लोगों की शब्दावलियाँ वास्तविक रंगीनियों से भरी हैं. मैंने सिर्फ ये देखने की कोशिश की कि लोग किन शब्दों को खोजते हुए मेरे चिट्ठे पर आते हैं, और परिणाम ये रहे. ये 250 शीर्ष के कुंजीशब्द हैं जिन्हें इंटरनेट सर्च पर प्रयोग कर पाठक मेरे चिट्ठे पर पहुँचे. इससे तो एक बारगी मुझे ऐसा लगने लगा  कि क्यों न मैं अपनी सेंडल उतार कर फेंक दूं और एक वैश्यालय खोल लूं. मैं आखिर चिट्ठाकारी क्यों कर रही हूं, चिट्ठाकारिता को क्यों प्रमोट कर रही हूं और लोगों को क्यों ये बताती फिरती हूं कि चिट्ठे उन्हें अपनी अभिव्यक्ति को प्रकट करने का शसक्त माध्यम प्रदान कर रहे हैं?</p></blockquote>
<p>इसके बाद वे उन 250 शब्दों की सूची प्रस्तुत करती हैं जिनके जरिए पाठक उनके चिट्ठे पर पहुँचे.</p>
<p><strong>सऊदी अरब : </strong></p>
<p>सऊदी अरब की  <em><a href="http://delhi4cats.wordpress.com/2008/03/13/blog-search-terms/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/delhi4cats.wordpress.com');"> अमरीकन बेदू</a></em> अपने चिट्ठे पर आने वाले पाठकों के बारे में अपने विचारों को कुछ यूं साझा करती हैं :</p>
<blockquote><p>सऊदी राज्य के दैनिंदनी अनुभवों को साझा करने के अतिरिक्त मैं अपने चिट्ठे पर शब्दों के जरिए सर्च कर आने वाले पाठकों पर भी ध्यान रखती हूं. ब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म के लिए वर्डप्रेस का प्रयोग करने वालों के लिए यह एक बहुत बड़ी सुविधा है, जिसे मेरे जैसे गैर तकनीकी लोग भी आसानी से प्रयोग और प्रबंधित कर सकते हैं. यह आपको आपके चिट्ठा पाठकों के दैनिक, साप्ताहिक, मासिक तथा वार्षिक आंकड़े देता है. इससे ये तो पता चलता ही है कि नित्य कितने पाठकों ने आपके चिट्ठे को पढ़ा बल्कि ये भी कि वे कौन सी पोस्टें पढ़ते हैं. जैसा कि मैंने शुरूआत में बताया है, मुझे नित्य के खोजे गए शब्दों की सूची भी मिलती है जिनके जरिए मेरे चिट्ठों पर पाठक पहुंचते हैं. इन शब्दों की समीक्षा करने पर कभी कभी मुझे ये लगता है कि जो शब्द पाठकों को आकर्षित कर रहे हैं और जिनके लिए वे खोजबीन कर रहे हैं उन पर पोस्ट लिखा जाना चाहिए तो मैं लिखती भी हूं. और कभी कभी किन्हीं खोजे गए शब्दों को देख कर  ये भी लगता है कि सर्च इंजिनों ने इन शब्दों में ऐसा क्या पाया कि उन्होंने पाठकों को मेरे चिट्ठे पर भेज दिया!</p></blockquote>
<p><strong>लेबनान: </strong></p>
<p>जब लेबनानी चिट्ठाकार <em><a href="http://rambleb.blogspot.com/2008/03/haifawehbesexpicture.html" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/rambleb.blogspot.com');">एंटोउन</a></em> को यह पता चला कि उनके चिट्ठे के कोई 20 प्रतिशत पाठक लेबनानी पॉप स्टार  <a href="http://www.answers.com/Haifa+Wehbe?cat=entertainment" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.answers.com');">हाइफ़ा वेहबे</a> के ऊपर लिखे गए चिट्ठे के कारण आकर्षित हुए तो उन्होंने ईंट का जवाब पत्थर से देने की ठानी और अपने चिट्ठे पर लेबनान के हॉट स्टारों के और चित्रों को पोस्ट किया. वे स्पष्ट करते हैं:</p>
<blockquote><p>मैंने यह पाया है कि कम से कम 20 प्रतिशत हिट्स जो मेरे चिट्ठे को मिलते हैं वो कामुक व्यक्तियों   (पुरुषों, तथा कुछ मात्रा में स्त्रियों ) के होते हैं जो हाइफ़ा वेहबे के चित्रों के लिए सर्च करते हुए आते हैं. पिछले सप्ताह मैंने हाइफ़ा वेहबे तथा राजनीतिक इस्लाम के बारे में एक पोस्ट लिखा था. मैं आपको बताता हूँ कि इस चिट्ठे पर गूगल के जरिए खोज कर आने वाले इन कामुकों ने खोज के लिए किन शब्दों का प्रयोग किया था:</p>
<p>* हाइफ़ा वाहबी, सेक्स<br />
* f****d हाइफ़ा वेहबे के चित्र<br />
* हाइफ़ा के अच्छे फोटो<br />
* चित्र सेक्स हाइफ़ा</p>
<p>अब आपको अंदाजा हो गया होगा. तो फिर मैंने क्या किया. मैंने लेबनान और इसकी क्षेत्रीयता की समस्याओं के बारे में गंभीरता से चर्चा करने के बजाए अपने चिट्ठे पर मैंने हाइफ़ा के और ढेर सारे चित्र लोड कर दिए. मैंने  <a href="http://www.answers.com/Nancy+Ajram?cat=entertainment" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.answers.com');">नैंसी अजराम </a> तथा <a href="http://www.answers.com/topic/elissa-singer?cat=entertainment" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.answers.com');">एलिसा</a> के चित्र भी अपने चिट्ठे में टांग दिए. अब कम से कम हाइफ़ा+वेहबे+सेक्स ढूंढने वालों को मेरे चिट्ठे से निराश नहीं होना पड़ेगा. कभी कभी आपूर्ति भी आवश्यकता को न्यायोचित बनाती है. यदि मैं कुछ पाठकों को आकर्षित कर पाता हूं तो  संभवतः वे कुछ देर मेरे चिट्ठे पर रुकें, देखें और, ब्राउज़िंग के दौरान, हो सकता है एकाध गंभीर विषय को पढ़ भी लें.</p></blockquote>
<p><strong>मिस्र:</strong><br />
<em><br />
मिस्र के  <a href="http://www.whisperofmadness.com/2008/03/13/a-personal-favorite-maybe-a-classic/#comments" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.whisperofmadness.com');"> डी बी शोब्रावे</a></em> ने भी पड़ताल किया  कि उनके चिट्ठे की कौन सी चीजें पाठकों को खींच लाती हैं. और जब उन्होंने पाया कि उनका अब तक का सबसे बढ़िया  ‘डेलिसियस&#39; पोस्ट लोगों की निगाहों में नहीं चढ़ा तो उन्होंने इसे फिर से प्रकाशित करने का निर्णय लिया<span style="font-style: italic;">. </span><em>शोब्रावे </em>अपने इस कदम को कुछ यूं स्पष्ट करते हैं:</p>
<blockquote><p>यदा कदा मैं अपने साइट के पाठकों के आवाजाही के आंकड़ों पर नजर मारता हूँ और यह समझने की कोशिश करता हूँ कि वे क्या पढ़ना चाहते हैं और वे किस विधि से मेरी साइट पर आए. आज मैंने देखा तो पाया कि ताजातरीन पोस्टों हमस तथा फालाफेल के युद्ध, हॉट मिस्री लड़कियाँ तथा हिलेरी क्लिंटन और बराक ओबामा के बारे में लिखे मेरे सभी पोस्टों को तो लोग पढ़ रहे हैं, परंतु मेरे पसंदीदा पोस्ट पर न तो सर्च इंजिन का और न ही लोगों का ध्यान गया है. और वह पोस्ट तो मेरा सबसे बढ़िया पोस्ट है, यह मैं कह सकता हूं. मैंने आज इसे फिर से पढ़ा तो लगा कि इसे किसी और ने लिखा है और यह वाकई लाजवाब है. तो मैं इसे फिर से पोस्ट कर रहा हूँ ताकि जिनसे छूट गया हो वे पढ़ सकें.</p></blockquote>
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		<title>फ्लिकर पर वीडियो : विरोध के तीख़े सुर</title>
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		<pubDate>Wed, 16 Apr 2008 16:37:27 +0000</pubDate>
		<dc:creator>raviratlami</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[Bolivia]]></category>

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		<description><![CDATA[अभी फ्लिकर वीडियो सेवा को चालू हुए सत्रह घंटे भी नहीं बीते हैं कि “फ्लिकर में कोई वीडियो नहीं चलेगी नहीं चलेगी ”  नाम के फ्लिकर समूह में  5475 से अधिक सदस्य और  670 वस्तुएँ एकत्र हो चुके हैं. इससे भी ज्यादा आश्चर्यजनक यह है कि, “फ्लिकर में वीडियो हमें नहीं चाहिए [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>अभी फ्लिकर वीडियो सेवा को चालू हुए सत्रह घंटे भी नहीं बीते हैं कि “<a href="http://www.flickr.com/groups/no_video/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.flickr.com');">फ्लिकर में कोई वीडियो नहीं चलेगी नहीं चलेगी </a>”  नाम के फ्लिकर समूह में  5475 से अधिक सदस्य और  670 वस्तुएँ एकत्र हो चुके हैं. इससे भी ज्यादा आश्चर्यजनक यह है कि, “<a href="http://www.flickr.com/groups/no_video_on_flickr/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.flickr.com');">फ्लिकर में वीडियो हमें नहीं चाहिए</a> “ नाम के समूह में जो कि पहले बताए गए समूह के दो घंटे बाद बनाया गया, दोगुने से ज्यादा सदस्य हैं. और, जैसे कि इन समूहों के नाम से जाहिर है, ये फ्लिकर में वीडियो अपलोड की दी गई सुविधा का विरोध कर रहे हैं. इन समूहों के सदस्य फ्लिकर प्रयोक्ता हैं जिन्हें फ्लिकर के पारंपरिक फोटो साझा सुविधा में वीडियो साझा सुविधा जोड़ा जाना रास नहीं आ रहा है. जबकि वर्तमान स्थिति में फ्लिकर में अपलोड करने वाले समूह सदस्यों की संख्या ले देकर 30 तक ही पहुँची है. आखिर वे क्या वजहें हो सकती हैं जिसके कारण याहू और फ्लिकर के द्वारा वीडियो अपलोड करने की सुविधा दी जाने के निर्णय के प्रति उपयोक्ता असंतुष्ट से रहे हैं?</p>
<p>इन समूहों के अधिकतर उपयोक्ताओं को अंदेशा है कि वीडियो अपलोड की सुविधा से फ्लिकर में चित्रों को ब्राउज़ करने, डाउनलोड-अपलोड करने की गति में कमी और कठिनाईयाँ आ सकती हैं. कुछ को इसलिए क्रोध है कि चूंकि वे फ्लिकर को सिर्फ फोटोग्राफ़ी का प्लेटफ़ॉर्म मान कर इसमें शामिल हुए थे, न कि वीडियो के लिए.  उनका अंदेशा है कि उन्होंने जो सहयोगी समुदाय फ्लिकर में बनाया हुआ है वो खत्म हो जाएगा और “ जो बाकी बच रहेगा वो लोगों के विश्वासों, इरादों तथा क्षमताओं पर आग लगाने जैसे काम में ही आएगा.”  इस परिदृश्य के अन्य चिट्ठों को  आप  <a href="http://www.flickr.com/groups/no_video/discuss/72157604446812868/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.flickr.com');"> इस कड़ी में जाकर</a> पढ़ सकते हैं. हालांकि इन समूहों में से कुछेक का ये भी मानना है कि चूंकि सिर्फ उन्नत उपयोक्ताओं को ही वीडियो अपलोड की सुविधा प्रदान की गई है, यह एक तरह से गुणवत्ता छन्नी के जैसा काम करेगा और यह फ्लिकर में सिर्फ वीडियो अपलोड करने की खातिर आने वाले नए लोगों को आकर्षित नहीं करेगा.  कुछ अन्य को विश्वास है कि यह छायाकारों के लिए उनके चित्रों के स्लाइड शो तथा चलचित्र एनीमेशन तैयार करने में मददगार होगा और इस तरह उनके उत्पादों में मूल्य जोड़ेगा. वहां पर इस विषय में  <a href="http://www.flickr.com/groups/no_video/discuss/72157604458920697/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.flickr.com');"> स्पेनी भाषा में चर्चा करने के अनुरोध </a> भी हैं, तथा जिस याचिका को लगाने हेतु वे हस्ताक्षर अभियान चला रहे हैं उसका अनुवाद भी वहां है.</p>
<p>तो, अब तक किस तरह की सामग्रियाँ वहां अपलोड की गई हैं ?, <a href="http://www.flickr.com/photos/creepysleepy/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.flickr.com');">क्रीपीस्लीप</a> ने  <a href="http://www.flickr.com/photos/creepysleepy/2399370359/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.flickr.com');"> एक किशोर के पैर के गहरे जख़्म के इलाज </a>  का वीडियो अपलोड किया है, और ये दक्षिणी सूडान के जीवन के बहुत से अपलोड किए वीडियो में से एक है.</p>
<p><center><embed src="http://www.flickr.com/apps/video/stewart.swf?v=1.168" type="application/x-shockwave-flash" flashvars="intl_lang=en-us&amp;photo_secret=40983a8f7b&amp;photo_id=2399370359&amp;flickr_show_info_box=true" allowfullscreen="true" bgcolor="#000000" height="300" width="400"></embed></center></p>
<p>एक अन्य वीडियो  <a href="http://www.flickr.com/photos/airin/2401182388/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.flickr.com');"> यूनी, बोलीविया के उन बच्चों का है जो पर्यटकों के मनोरंजन के लिए गा-बजा रहे हैं </a>,  इसे अपलोड किया है <a href="http://www.flickr.com/photos/airin/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.flickr.com');">आई-रेन इशि</a> ने. <a href="http://www.flickr.com/photos/mrfrosted/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.flickr.com');"> मि. फ्रॉस्टेड </a> ने नीचे दिया गया वीडियो अपलोड किया है जिसमें आप  <a href="http://www.flickr.com/photos/mrfrosted/2399310285/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.flickr.com');"> विएतनाम की सड़क पर चमकीले नीले रंग के कचरागाड़ी को इसके ट्रेडमार्क गीत  </a> के साथ देख सकते हैं. इनके ऐसे दर्जनों अन्य क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेंस युक्त वीडियो तमाम विश्व में विविध स्थानों पर उपलब्ध हैं.</p>
<p><center><embed src="http://www.flickr.com/apps/video/stewart.swf?v=1.168" type="application/x-shockwave-flash" flashvars="intl_lang=en-us&amp;photo_secret=d5f94400c5&amp;photo_id=2399310285&amp;flickr_show_info_box=true" allowfullscreen="true" bgcolor="#000000" height="300" width="400"></embed></center></p>
<p>यह आखिरी वीडियो जो नीचे दिखाया गया है वो वस्तुतः फ्लिकर टोली द्वारा <a href="http://flickr.com/groups/video/pool/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/flickr.com');">वीडियो! वीडियो! वीडियो!</a> समूह के लिए फ्लिकर के अब तक के चंद सर्वश्रेष्ठ वीडियो उदाहरणों के रुप में चुना गया है. और यह वीडियो है  “<a href="http://www.flickr.com/photos/antimega/2397432981/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.flickr.com');">शिनकानसेन से माउन्ट फुजी </a>” जिसे अपलोड किया है by <a href="http://www.flickr.com/photos/antimega/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.flickr.com');">एंटीमेगा</a> ने.</p>
<p><center><embed src="http://www.flickr.com/apps/video/stewart.swf?v=1.168" type="application/x-shockwave-flash" flashvars="intl_lang=en-us&amp;photo_secret=b4d35d51bd&amp;photo_id=2397432981" allowfullscreen="true" bgcolor="#000000" height="300" width="400"></embed></center></p>
<p>अब आपके विचार चाहे जो हों - कि फ्लिकर में वीडियो रहे या नहीं, फ्लिकर के उपयोक्ता इस नए विकल्प का प्रयोग करने लगे हैं और अपने वीडियो अपलोड करने लगे हैं : अब यह देखना दिलचस्प होगा कि याहू और फ्लिकर इस परिवर्तन से अप्रसन्न हुए समूहों से कैसे निपटता है.</p>
<p><small>लघुछवि चित्र  <a href="http://www.flickr.com/photos/pjb2332/2400764103/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.flickr.com');"> फ्लिकर में कोई वीडियो नहीं</a> है जो by <a href="http://www.flickr.com/photos/pjb2332/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.flickr.com');"> द मंकी 2332 </a> का है. छवि का प्रयोग <a href="http://creativecommons.org/licenses/by/2.0/deed.en" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/creativecommons.org');"> क्रिएटिव कॉमन्स लाइनसेंस </a> के तहत किया गया.</small></p>
]]></content:encoded>
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		<title>रूसः एसयूपी और लाईवजर्नल</title>
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		<pubDate>Fri, 07 Dec 2007 18:40:40 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Debashish</dc:creator>
		
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		<description><![CDATA[रोपर्ट एमस्टर्डम ब्लॉग लाईवजर्नल को हाल में खरीदने वाली कंपनी एसयूपी के निदेशक से सीएमएस वायर द्वारा लिये साक्षात्कार की निंदा करते हुये लिखता है, &#8220;रिपोर्टर ने बड़े नर्म सवाल पूछे और खास मुद्दों पर कोई पूछताछ नहीं की, मसलन अगर सुरक्षा एंजेसियाँ खास चिट्ठाकारों की व्यक्तिगत जानकारी चाहे तो एसयूपी की नीति क्या होगी।&#8221;
]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>रोपर्ट एमस्टर्डम ब्लॉग लाईवजर्नल को हाल में खरीदने वाली कंपनी एसयूपी के निदेशक से सीएमएस वायर द्वारा लिये <a href="http://www.robertamsterdam.com/2007/12/sups_shenderovich_talks_about.htm" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/www.robertamsterdam.com');">साक्षात्कार की निंदा</a> करते हुये लिखता है, &#8220;रिपोर्टर ने बड़े नर्म सवाल पूछे और खास मुद्दों पर कोई पूछताछ नहीं की, मसलन अगर सुरक्षा एंजेसियाँ खास चिट्ठाकारों की व्यक्तिगत जानकारी चाहे तो एसयूपी की नीति क्या होगी।&#8221;</p>
]]></content:encoded>
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		<title>स्लोवेनियाः जिसे अक्सर भुला दिया जाता है</title>
		<link>http://hi.globalvoicesonline.org/slovenia-often-forgotten-country-and-its-tld/</link>
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		<pubDate>Wed, 05 Dec 2007 18:34:23 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Debashish</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[Cyber-Activism]]></category>

		<category><![CDATA[Governance]]></category>

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		<description><![CDATA[&#8220;अगले 28 दिनों में स्लोवेनिया को अगले 6 महीनों के लिये यूरोपियन यूनियन के राष्ट्रपति की जिम्मेवारी मिलने वाली है और यह पहला ऐसा मौका है क्योंकि स्लोवेनिया कुछ 1300 दिन पहले ही यूरोपियन यूनियन का सदस्य बना है। तो समय है इस अक्सर भुला दिये जाते देश के बारे में कुछ जानकारी बढ़ाने का, [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>&#8220;अगले 28 दिनों में स्लोवेनिया को अगले 6 महीनों के लिये यूरोपियन यूनियन के राष्ट्रपति की जिम्मेवारी मिलने वाली है और यह पहला ऐसा मौका है क्योंकि स्लोवेनिया कुछ 1300 दिन पहले ही यूरोपियन यूनियन का सदस्य बना है। तो समय है इस अक्सर भुला दिये जाते देश के बारे में कुछ जानकारी बढ़ाने का, जैसे कि स्लोवेनिया का इंटरनेट टॉप लेवल डोमेन (TLD) क्या है&#8221;, <a href="http://newtonline.wordpress.com/2007/12/04/its-time-to-learn-slovenias-top-domain/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/newtonline.wordpress.com');">लिख रहे हैं</a> टेल्स फ्रॉम द यूरोपियन अंडरबेली के जोनाथन न्यूटन।</p>
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		<title>ब्राज़ीलः चिट्ठाकार ही करतें हैं बहस शुरु</title>
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		<pubDate>Fri, 23 Nov 2007 06:23:46 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Debashish</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[Brazil]]></category>

		<category><![CDATA[Internet &#038; Telecoms]]></category>

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		<description><![CDATA[एमलॉग एक समाचार के बारे में बता रहे हैं जिसमें ये रपट दी गई है कि ब्राज़ीलियाई इंटरनेट पर होने वाली बहसों का एक तिहाई हिस्सा ब्लॉगमंडल से ही शुरु होता है। &#8220;तर्क देने के अलावा जब वे ब्राँड या उपभोग के रुख के बारे में के बारे में लिखते हैं तो उपभोक्ताओं के निर्णय [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>एमलॉग एक समाचार के बारे में <a href="http://mlonlinegeneration.wordpress.com/2007/11/23/quase-13-do-boca-a-boca-da-internet-se-origina-com-blogueiros/" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/mlonlinegeneration.wordpress.com');">बता रहे हैं</a> जिसमें ये रपट दी गई है कि ब्राज़ीलियाई इंटरनेट पर होने वाली बहसों का एक तिहाई हिस्सा ब्लॉगमंडल से ही शुरु होता है। &#8220;तर्क देने के अलावा जब वे ब्राँड या उपभोग के रुख के बारे में के बारे में लिखते हैं तो उपभोक्ताओं के निर्णय पर भी प्रभाव छोड़ते हैं।&#8221;</p>
]]></content:encoded>
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		<title>ब्राज़ील: इंटरनेट बिना सब सूना</title>
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		<pubDate>Sun, 18 Nov 2007 14:56:36 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Debashish</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[Brazil]]></category>

		<category><![CDATA[Internet &#038; Telecoms]]></category>

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		<description><![CDATA[मंगलवार से बिना इंटरनेट जी रहीं और साइबरकैफे से ब्लॉगिंग कर रही गैबरीला ज़ागो ब्राज़ीलियाई टेलिकॉम सेवा को अब तक की सबसे खराब सेवा करार देती हैं, &#8220;उन्होंने हमें फोन से इत्तला दी केबल चोरी हो गये हैं और अगले दिन समस्या को सुलझा लिया जायेगा, जबकि अगले दिन यानि गुरुवार को प्रोक्लेमेशन डे की [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>मंगलवार से बिना इंटरनेट जी रहीं और साइबरकैफे से ब्लॉगिंग कर रही गैबरीला ज़ागो ब्राज़ीलियाई टेलिकॉम सेवा को अब तक की सबसे खराब सेवा <a href="http://gabrielaz.blogspot.com/2007/11/brasil-telecom-o-pior-atendimento-do.html" onclick="javascript:pageTracker._trackPageview ('/outbound/gabrielaz.blogspot.com');">करार देती हैं</a>, &#8220;उन्होंने हमें फोन से इत्तला दी केबल चोरी हो गये हैं और अगले दिन समस्या को सुलझा लिया जायेगा, जबकि अगले दिन यानि गुरुवार को प्रोक्लेमेशन डे की छुट्टी थी।&#8221; उन्हें यकीन है कि समस्या एक हफ्ते से पहले नहीं सुलझने वाली।</p>
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