2008-09-15
मिस्र : धार्मिक वर्ग-भेद का वीडियो गेम
हाल ही में मुसलिम मैसाकर नाम का एक वीडियो गेम जारी किया गया है जिसमें खिलाड़ी नाना प्रकार के हथियारों का उपयोग करते हुए चाहे जितने मुसलमानों को मार सकता है जिसमें सर्वशक्तिमान अल्लाह भी शामिल है. जाहिर है, मिस्री चिट्ठाकारों ने त्वरित प्रतिक्रियाएँ ...
2008-04-04
2007-12-05
रूसः पुतिन को मुसलमानों का साथ
विंडो ओन यूरेशिया रूसी मुसलमानों के वोट डालने के रूख के बारे में लिखते हैं, "Islam.ru के शोध विभाग के प्रमुख अब्दुल्ला रिनात मुखामेतोव के मुताबिक मुसलमानों ने यूनाईटेड रशिया के लिये वोट दिया और इस तरह पुतिन का साथ दिया, यह दिखाने के लिये कि वे एक शक्तिशाली, एकजूट ...
2007-11-24
लेबनानः पंथ बनी पहचान?
लेबनानी चिट्ठाकार एम बीबीसी पर भीड़ का अनुसरण करने का आरोप लगाते हैं क्योंकि वो जिन लोगों का साक्षात्कार लेती है उनकी पहचान उनके संप्रदाय से करती है।
2007-10-16
2007-10-06
अरबी : आपका धर्म क्या है?
कुछ अरब देशों में दफ़्तरशाही जीवन का अभिन्न अंग है. मिस्र के चिट्ठाकार नोरा यूनिस ने हमें दिखाया है कि जब दफ़्तरशाही के कामकाज धार्मिकता के साथ जुड़ते हैं तब क्या हो जाता है. इस पोस्ट में मैंने अरबी से अनुवाद किया है.
नोरा ने लिखा है:
صباح أمس الأول توجهت لمصلحة ...
2007-09-17
सऊदी अरब: फुटपाथ पर भी लिंगभेद
फिलिस्तीनी चिट्ठाकार हैथम सबाह एक समाचार के हवाले से बता रहे हैं कि सऊदी अरब में जल्द ही लिंग के आधार पर बंटे साईडवॉक (फुटपाथ) दिखने लगेंगे। "क्या पैगंबर मुहम्मद ने दो साईडवॉक बनाने का हुक्म जारी किया, एक मर्द के लिये एक और के लिये? औरतों के लिये अलग ...
2007-09-06
इराकः क्या इस्लाम ही हल है?
इराक द मॉडल पूछते हैं क्या इराक में हिंसा के खात्मे का हल इस्लाम है? उनका जवाब है, "सचाई यह है कि राजनीतिक इस्लाम समस्या का हल नहीं वरन जड़ है। और ये केवल ईराक ही नहीं इस क्षेत्र के अन्य अनेक देशों के बारे में सच है जहाँ राजैनतिक ...
2007-08-30
फिलिस्तीन: तुर्की में इक गुल
फिलिस्तीनी चिट्ठे कबाबफेस्ट के फय्याद तुर्की कें नवनिर्वाचित राष्ट्रपति अब्दुल्ला गुल के बारे में लिखते हैं, "विडंबना है कि तुर्की में कुछ धर्मनिरपेक्ष चरमपंथियों को भी गुल की बेगम हैरुन्निसा का हिजाब, जिस पर तुर्की के सभी सार्वजनिक संस्थानों में पाबंदी है, पहनना नागवार गुज़र रहा है, खासतौर पर जब ...
2007-08-29
ओमान: एक ही दिन हो रमज़ान
ओमानी चिट्ठाकार स्लीपलेस उम्मीद जता रहे हैं कि सभी इस्लामी देश रमज़ान की शुरुवात एक ही दिन करना तय करेंगे। वे लिखते हैं "उम्मीद की जाय कि इस बार हम पूरे अरब व इस्लामी विश्व में एक ही दिन पर रज़ामंद होंगे बजाय इसके कि बेवकूफ बनें और फिर कहें ...






