2007-11-03
आर्मीनियाः खुला पत्र
तुर्की लेखक व चिट्ठाकार मुस्तफा अक्योल की आर्मीनियाई जातिसंहार विषय पर आप्रवासी आर्मीनियाई को लिखे खुले पत्र का जवाब "लाईफ इन आर्मीनिया" चिट्ठे के लेखक रफी ने तुर्की नागरिकों को लिखे अपने खुले पत्र से दिया है। 1915 से 1917 के बीच हुई घटनाओं को जातिसंहर का दर्जा देते हुये ...
2007-08-09
आर्मीनिया: विश्व बैंक ने दिया जवाब
भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रही विश्व बैंक ने अब आर्मीनियाई चिट्ठाकार ओनिक क्रिकोरियन को औपचारिक जवाब भेजा है। हालांकि ओनिक मानते हैं कि अगर वो कुछ छुपा नहीं रही है तो उसे आधिकारिक रूप से कारणों की खुली छानबीन शुरु करनी चाहिये।





