तुर्की लेखक व चिट्ठाकार मुस्तफा अक्योल की आर्मीनियाई जातिसंहार विषय पर आप्रवासी आर्मीनियाई को लिखे खुले पत्र का जवाब “लाईफ इन आर्मीनिया” चिट्ठे के लेखक रफी ने तुर्की नागरिकों को लिखे अपने खुले पत्र से दिया है। 1915 से 1917 के बीच हुई घटनाओं को जातिसंहर का दर्जा देते हुये वे लिखते हैं कि इस बकाया घटना का हमेशा के लिये हल निकालने का यह सही समय है ताकि आर्मीनियाई और तुर्क आगे बढ़ सकें और “अंततः एक दूसरे का साथ शाँतिपूर्वक जीना शुरु कर सकें”।
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3 November 2007
30 August 2007

फिलिस्तीन: तुर्की में इक गुल
फिलिस्तीनी चिट्ठे कबाबफेस्ट के फय्याद तुर्की कें नवनिर्वाचित राष्ट्रपति अब्दुल्ला गुल के बारे में लिखते हैं, “विडंबना है कि तुर्की में कुछ धर्मनिरपेक्ष चरमपंथियों को भी गुल की बेगम हैरुन्निसा का हिजाब, जिस पर तुर्की के सभी सार्वजनिक संस्थानों में पाबंदी है, पहनना नागवार गुज़र रहा है, खासतौर पर जब वे राष्ट्रपति के महल में ये पहन दाखिल होंगी।”Fayyad
17 August 2007

तुर्की ने वर्डप्रेस डॉट कॉम पर रोक लगाई
लोकप्रिय व मुफ्त ब्लॉगिंग प्लेटफार्म वर्डप्रेस डॉट कॉम पर तुर्की में रोक लगा दी गई है और आगंतुकों को ये संदेश दिख रहा है, “निर्णय क्रः 2007/195 के तहत इस जालस्थल की पहुंच स्थगित कर दी गई है।, टीसी फतीह 2, दीवानी अदालत”। वर्डप्रेस के संस्थापक मैथ्यू मुलेनवेग ने कहा, “मुझे पता न था कि तुर्की के पास चीन की तरह ग्रेट वॉल आफ फायरवाल है। ये बेहद दुर्भाग्यशाली बात है क्योंकि तुर्की का ब्लॉगर समुदाय काफी सक्रिय है और हमें तकरीबन 12 करोड़ पेजव्यू वहाँ से मिलते हैं।





























आरएसएस फीड Turkey 




देबू भाई कुछ दिनों से मन में एक विचार चल रहा था, लोरियों को जमा...