The Global Voices Lingua project hopes to bring GV content to new linguistic audiences - Details

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देश:
India
विषय:
Freedom of Speech, Internet & Telecoms, Law
भाषाएं:
English

 

जाल जगत् में चिट्ठाकार एक तरह से असुरक्षित ही बने रहते हैं. अनाम या छद्म नामधारी होने के बावजूद मिलने वाली धमकियाँ ये सिद्ध करती हैं कि कोई चिट्ठा कितना महत्वपूर्ण हो सकता है. इंजी पेन्नु तथा केरल्स.कॉम के प्रकरण ने चिट्ठासंसार में तूफ़ान सा मचा दिया है. केरल तथा मलयाली भाषा पर आधारित केरल्स.कॉम ने एक चिट्ठाकारा को डराने व धमकाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. चिट्ठाकारा इंजी पेन्नु जो  जिंजर एंड मैंगो नाम का चिट्ठा लिखती हैं, ने केरल्स.कॉम से बड़े ही नम्रता पूर्वक निवेदन किया कि उनके चिट्ठे से चोरी कर उठाई गई सामग्री को केरल्स.कॉम से हटा दिया जाए. बाद में इंजी ने केरल्स.कॉम के अनपेक्षित प्रत्युत्तर का विरोध किया. इंजी तथा केरल्स.कॉम के बीच हुए पत्राचार के प्रकाशित होने पर इंजी के चिट्ठा पाठकों की आक्रोषित प्रतिक्रियाएं रहीं. चिट्ठों से सामग्री चोरी की घटनाएं नई नहीं हैं, परंतु जिस साइट ने सामग्री चोरी की, उसके द्वारा सीना जोरी किया जाना, धमकियाँ दिया जाना, धौंसपट्टी जमाना – ये जरूर कुछ अलहदा सा रहा.

फिर उसके बाद धमकियों, दुर्व्यव्हार और नक़ली कानूनी नोटिस का दौर चला. केरल्स.कॉम के इन गलत कार्यों की आलोचना करने वाले पोस्टों को हटाने के लिए उन्होंने चिट्ठाकारों को आदेशित करना शुरू कर दिया. यह तो सचमुच पागलपन था – चिट्ठाकारों को इस तरह आदेशित करना. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के क्या यही मायने हैं?…..

इसके बाद श्री शिव कुमार ने मुझे मेरे बोलने की सजा के तौर पर शारीरिक क्षति पहुँचाने की धमकी दी. उन्होंने अपने अगले ईमेल में कहा कि वो मेरे जैसे लोगों के लिए अप्रत्याशित, अनपेक्षित वार करना जानते हैं.

हिन्दी ब्लॉग रिपोर्टर ने लिखा

अपने ताजातरीन पोस्ट में उन्होंने साइबर उद्योग के इस पुरातन समूह से प्राप्त धमकी भरे ईमेल के उदाहरण दिए. संक्षिप्त से शोध के उपरांत इंजी को ज्ञात हुआ कि यह समूह  पॉर्न साइट तो चलाता ही है, साथ ही अनाथों के लिये कुछ दान दक्षिणाएँ भी मुहैया कराता है.

यह भी पता चला कि केरल्स.कॉम ने अन्य चिट्ठों से भी सामग्रियों की चोरी की और उनके नाम से प्रकाशित कर दिया जबकि उन्होंने ये सामग्रियाँ लिखी ही नहीं थीं.  जयरंजन्स ब्लॉग ने लिखा

केरल्स.कॉम द्वारा मलयालम चिट्ठों से सामग्री की चोरी की मैं तीखे शब्दों में भर्त्सना करता हूं. इसके अलावा, केरल्स.कॉम की सपोर्ट टीम ने उन साथी चिट्ठाकारों, जिन्होंने इस घृणास्पद कार्य की निंदा की, उन्हें धमकाया व उनसे दुर्व्यव्हार किया और, जैसे कि यह काफी नहीं था, उन्होंने साइबरशिकार जैसे प्रयास भी किए.

तुलसी ने कुछ गहरी छानबीन की, और लिखा

हाल ही में मैंने नोट किया कि माझाथल्ली.कॉम ने कॉपीराइट का उल्लंघन किया है. उन्होंने मेरे इस चिट्ठे से बगैर मेरी अनुमति या लिखित सहमति के अथवा बगैर मुझे श्रेय दिए, मेरे फोटोग्राफों को नक़ल किया. यही नहीं, उन्होंने मेरे उन चित्रों में केरल्स.कॉम का वाटरमार्क भी लगा दिया. इसके बाद मैंने आगे की जांच पड़ताल की तो पाया कि यो दोनों साइटें एक ही कंपनी – अनश्वर कंपनी प्रा. लि. की संपत्ति हैं. मुझे यह जानकर धक्का लगा कि वह व्यक्ति जिसने मेरे चित्रों की नक़ल की थी, उसमें अपने नाम व अपनी कंपनी  के नाम का वाटरमार्क लगाया, वो कोई और नहीं, बल्कि केरल्स.कॉम का सीईओ है.

सप्तवरंगल ने इस विवाद का विस्तृत खाका खींचा कि घटनाएं तरतीबवार किस तरह होती रहीं. उन्होंने इसी समूह के अन्य जाल स्थलों के बारे में भी कुछ पड़ताल की.

जैसा कि अब हम सबको पता है, केरल्स.कॉम पोर्टल के मलयालम खंड में भरने के लिए बहुत से मलयालम चिट्ठों से सामग्री चुराई गई. इसके बारे में सबसे पहले साजी ने बताया, और फिर उसके बाद जब बहुत से चिट्ठाकारों ने बताना शुरू किया तो केरल्स.कॉम द्वारा सामग्री चोरी के विस्तार का पता चला. एक अन्य साइट http://www.mazhathully.com/ ने तुलसी तथा कुमार के फोटोब्लॉग से फोटो चुराए.( मैंने केरल्स.कॉम के जरिए एक शुभकामना संदेश कुमार को भेजा था तो उसे देखते ही कुमार ने कहा कि यह फोटो उनके फोटो ब्लॉग में प्रकाशित है और बिना अनुमति के प्रयोग किया गया है. फिर उन्होंने केरल्स.कॉम को इस फोटो को हटाने के लिए लिखा.) केरल्स.कॉम तथा माझाथल्ली.कॉम एक ही ( गोडैडी.कॉम जाँच) कंपनी ‘अनश्वर ग्रुप ऑफ कंपनी प्रा. लि.' के हैं जो कि अमरीका तथा भारत के नक़ली पता का इस्तेमाल कर रहे हैं. जब मैंने आज जांच पड़ताल की तो पाया कि  http://www.mazhathully.com/ साइट अभी निलंबित स्थिति में है.

द ब्रीज ने उल्लेख किया कि केरल्स.कॉम के एक प्रतिनिधि ने इंजी पेन्नु का नाम घसीटा और एक नक़ली वेबसाइट तैयार किया.

मूल लेखक नेहा विश्वनाथन

4 टिप्पणियाँ

  1. समीर लाल कहते हैं:

    अच्छा किया हिन्दी अनुवाद करके.

  2. डॉ.सुभाष भदैरिया कहते हैं:

    मेरी ग़ज़लो की चोरी कर चोर महाशय ने एक दिन ही सारी ग़जलें अपनी पोस्ट पर प्रकाशित कर दी. मुझे इसकी सूचना रचनाजी की मेल से मिली. बस मैने चोर की रिमान्ड लेनी शुरू की चोर ने उसी रात ब्लाग डिलीट कर मुझे ब्लॉग पर आकर धमकाने की कोशिश और खुद ही जाल में आ गया उस समय हिन्दी चिट्ठा जगत के धुरंधर खामोश रहे.शास्त्रीजी ने अपनी प्रतिक्राया दी थी.
    आज मलयालम के चिट्ठे का बड़ो जोर शोर से बात की जार रही है- पर तब———-
    देखिये इस पते पर समझिये की चोर उचक्कों के साथ कैसे पेश आया जाता है-
    http://blog.360.yahoo.com/blog-WI46XMYibqRRUWVWIz2m5YTKZbXt4HXGtskp?p=129

  3. ghughutibasuti कहते हैं:

    बहुत दुखद बात है। शायद कुछ किया भी नहीं जा सकता। यदि कुछ संभव हो भी तो बिल्ली के गले में घंटी कौन डालेगा?
    घुघूती बासूती

  4. Mahendra Mishra कहते हैं:

    बहुत दुखद बात है

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