कुवैत से ज़ेड आश्चर्य प्रकट करते हैं कि तेल से बनाया पैसा अरब देश आख़िर कहाँ खरचते हैं, जबकि विश्व के 500 शीर्ष शिक्षा संस्थानों में केवल एक ही अरब विश्वविद्यालय शामिल है।
कुवैत से ज़ेड आश्चर्य प्रकट करते हैं कि तेल से बनाया पैसा अरब देश आख़िर कहाँ खरचते हैं, जबकि विश्व के 500 शीर्ष शिक्षा संस्थानों में केवल एक ही अरब विश्वविद्यालय शामिल है।
ये अजीब बात है.. चार लाइन के अनुवाद से हमें कैसे पता चलेगा कि कुवैत का पैसा कहां जाता है।
मैं समझा नहीं नीरज। अनुवादित चिट्ठे में ही तो “ज़ेड” के लिखे मूल पोस्ट की कड़ी दी गई है।
आश्चर्य की क्या बात है, सब पैसा स्विट्ज़रलैन्ड, लक्ज़मबर्ग आदि के बैंकों में ठसा-ठस भरा होता है, रईस शेख अपने पास जवाहरातों के तौर पर भी रखते हैं और हर तरह की संभव मौज लेते हैं!!