चुप! ने राष्ट्रपति मुशर्रफ द्वारा मीडिया पर नवंबर 2007 में आपातकाल के समय लगाये गये कड़े प्रतिबंधो को पाकिस्तान की नई सरकार द्वारा हटाये जाने पर लिखा है।
चिट्ठाकार टूकोल्डकहते हैं (चीनी भाषाई पोस्ट) कि चीनी लोगों को विदेशी मीडिया व विदेशियों की टिप्पणीयों से इतनी आसानी से उत्तेजित नहीं हो जाना चाहिये। उनका इशारा अदाकारा शेरोन स्टोन के चीन में आये हालिया भूकंप को तिब्बत समस्या से जोड़ कर दिये वक्तव्य की और था। चिट्ठाकार ने लिखा है कि चीनी मीडिया ने भी अन्य देशों में घटी ऐसी दुर्भाग्यशाली घटनाओं पर पहले बेदर्दी से टिप्पणीयाँ की हैं।
एक भारतीय वेबसाईट kerals.com ने ब्लॉग से सामग्री चोरी करने के एक चिट्ठाकार के आरोप का जवाब देने का नया तरीका अपनाया। धमकियों और गालियों के माध्यम से। विस्तृत जानकारी जिंजर एंड मेंगो चिट्ठे पर।
दक्षिण अफ्रीका में विदेशी व बाहरी लोगों पर हुये हालिया हमलों के लिये डेविड सरकार को दोषी ठहराते हैं: “विदेशियों से जितनी नफरत दक्षिण अफ्रीकी करते हैं उतना शायद कोई नहीं करता। दक्षिण अफ्रीका आधिकारिक रूप से विश्व का सर्वाधिक ज़ीनोफोबिक (xenophobic) देश माना जाता है। नफरत तक ठीक है पर 50 अप्रवासियों की हत्या के गुनाह का क्या अर्थ है? राष्ट्रपति थाबो म्बेकी ने इस कृत्य को शर्मनाक बताया हे पर मैं मानता हूं कि यह घृणित काम है। यह कानूनन जुर्म है और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिये।”
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।
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