GlobalVoices in और जानें »

भारत : ओलंपिक मशाल और तिब्बत

TranslationsThis post also available in:

繁體中文 · 印度:藏獨人士反奧運聖火傳遞
简体中文 · 印度:藏独人士反奥运圣火传递
English · India: The Olympic Torch and Tibet

लगता है लोगों के दिलो-दिमाग से तिब्बत का निकल पाना मुश्किल है. भारत की आभासी दुनिया में इसे न सिर्फ जनता का जबर्दस्त समर्थन हासिल हो रहा है, बल्कि तिब्बत समस्या पर गर्मागर्म बहसें बातचीत का प्रमुख विषय बनी रही हैं. भारत के प्रसिद्ध फुटबॉल खिलाड़ी बाइचुंग भूटिया ने अप्रैल के मध्य में होने वाले ओलंपिक मशाल दौड़ में शामिल होने से मना कर दिया है. बौद्ध धर्म के अनुयायी भूटिया, भारतीय राज्य सिक्किम से हैं. उन्होंने भारतीय मीडिया से कहा कि तिब्बती जनता को समर्थन देने का यह उनका अपना तरीका है. जाहिर है, भूटिया के इस कदम को बहुत से भारतीय चिट्ठाकारों का भी समर्थन मिला है.

इंसैनिटी रीडिस्कवर्ड के सुशभ लिखते हैं कि वे भूटिया के ओलंपिक मशाल लेकर दौड़ने का बहिष्कार करने के निर्णय से वे अपने आप को गौरवान्वित अनुभव करते हैं वहीं सुदर्शन लिखते हैं कि उन्हें इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि भारतीय फुटबॉल टीम विश्वकप फ़ाइनल में पहुंच पाती भी है या नहीं, पर भूटिया के निर्णय से वे गौरवान्वित महसूस हो रहे हैं. पेट्रिक्स लिखते हैं कि अंततः हमारे पास एक ऐसा सेलेब्रिटी है जो चीन के विरुद्ध सरेआम खड़ा होने की ताक़त दिखा सकता है.

जबकि अविनाश के विचार दूसरे हैं और वे लिखते हैं कि तिब्बत पर चर्चा होनी चाहिए, परंतु अभी नहीं, क्योंकि ओलंपिक तो वैश्विक घटना है. उनका मानना है कि बीजिंग ओलंपिक और तिब्बत को अलग करके देखना चाहिए- क्योंकि ये दोनों ही विषय अलहदा हैं.

इधर जबकि भूटिया ने ओलंपिक मशाल को लेकर दौड़ने से मना किया है, बॉलीवुड कलाकार आमिर खान ने घोषणा की है कि वे ओलंपिक मशाल लेकर दौड़ेंगे. आमिर का यह निर्णय चहुँ ओर चर्चा का विषय बना हुआ है. आमिर, (संभवतः देश का एकमात्र फ़िल्मी सितारा जो चिट्ठा लेखक भी हैं) अपने निर्णय के बारे में खुलासा करते हुए लिखते हैं :

“मेरा स्पष्ट रूप से यह मानना है कि मैं पूरी तरह से किसी भी क़िस्म की हिंसा के विरुद्ध हूँ, तथा यह भी कि निश्चित रूप से मुझे दुनिया के किसी भी कोने में हो रहे मानवाधिकारों के हनन की घटनाएं मुझे व्यक्तिगत रूप से परेशान करती हैं.”

वे आगे लिखते हैं:

“जिन्होंने भी मुझसे ओलम्पिक मशाल रैली में भाग लेने से मना किया है मैं उन सभी से ये निवेदन करना चाहता हूँ कि जब मैं 17 अप्रैल को ओलंपिक मशाल लेकर दौड़ूंगा तो यह चीन के समर्थन में कतई नहीं होगा. वस्तुतः यह दौड़ मेरे दिल में तिब्बतियों और विश्व के उन तमाम व्यक्तियों के लिए जो मानवाधिकार हिंसा के शिकार रहे हैं, के प्रति प्रार्थना सहित होगी.”

आमिर के इस चिट्ठे में चिट्ठाकारों की प्रतिक्रियाओं की बौछारें लग गईं. रमन्स स्ट्रेटेजिक एनॉलिसिस आमिर को लिखे अपने खुले खत में लिखते हैं :

“विश्व में आपके लाखों करोड़ों प्रशंसक हैं. और आपका निर्णय चाहे जो भी हो, आपके लाखों करोड़ों प्रशंसक बने रहेंगे. परंतु बहुतों के मन में आपके प्रति शून्य का वह भाव भी जागेगा जिसमें आपकी वो असफलता झलकेगी जिसमें आपकी सही और गलत की पहचान ही नहीं थी.”

बेंच्ड@बैंगलोर्ड के प्रसन्न विश्वनाथन को आमिर का स्पष्टीकरण ने खासा आलोड़ित किया. वे लिखते हैं:

“(आमिर) वे इस तथ्य को छुपा नहीं सकते कि उनके निर्णय में व्यावसायिक मजबूरियाँ हैं, न कि ऊंचे विचार. या शायद इराक और अफ़गानिस्तान पर अमेरिकी अत्याचार अथवा मोदी सरकार के खिलाफ नर्मदा बचाओ आंदोलन जैसी बातें ही आमिर के दिल में भावात्मकता को झंकृत करती हैं. जो भी हो, ये तो तय बात है कि वामपंथी बुद्धिजीवियों के लिए सेलेक्टिव हार्ट ब्लीडिंग करना तो उनकी प्रामाणिकता रही है.”

Start the conversation

लेखक, कृपया सत्रारंभ »

निर्देश

  • कृपया दूसरों का सम्मान करें. द्वेषपूर्ण, अश्लील व व्यक्तिगत आघात करने वाली टिप्पणियाँ स्वीकार्य नहीं हैं।.