भारत : चेन्नई में तमिल ब्लॉग कैम्प

चेन्नई, भारत में 5 अगस्त 2007 को तमिल ब्लॉगर्स.ऑर्ग ने एक ब्लॉग-कैम्प आयोजित किया. ब्लॉग-कैम्प में आशा से दुगुनी संख्या में – तीन सौ से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया.

पिछले साढ़े चार वर्षों से तमिल चिट्ठे लोकप्रियता की नई सीढ़ियों पर निरंतर चढ़ते चले आ रहे हैं. आरंभ में तमिल चिट्ठों को नेट पर प्रचारित के लिए सभी तरह के उपाय किये गए. बाद में ऐसे ही प्रयास सिंगापुर से लेकर टोरंटो और सिडनी से भी किए गए. और जब लोगों में रूचि जगी तो तमिल भाषा के चिट्ठाकार दिन दूनी रात चौगुनी के दर पर बढ़ने लगे. सन् 2007 में तमिल चिट्ठों की संख्या में खासी बढ़ोत्तरी तो हुई ही, तमिल भाषाई चिट्ठों को प्रसिद्धि दिलाने के उपायों के लिए भी खासे प्रयास हुए.

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इससे पहले, कोयम्बटूर, तमिलनाडु में मई 2007 में एक छोटा सा चिट्ठा सम्मेलन आयोजित किया गया था. उस सम्मेलन ने चेन्नई में 5 अगस्त 2007 को ब्लॉग कैम्प आयोजित करने हेतु उत्प्रेरक का कार्य किया.

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लगभग 30 चिट्ठाकारों ने पिछले कई माह से इस आयोजन के लिए दिनरात कार्य किया और इस हेतु कोई 1000 ईमेल संदेशों का आदान-प्रदान इसके ई-पत्र समूह में हुआ. आयोजन की सफलता के लिए सभी ने हर स्तर पर अपने तईं प्रयास किए. और, कैम्प आयोजित हुआ भी एक सुंदर स्थान पर! मद्रास विश्वविद्यालय ने ब्लॉग कैम्प आयोजित करने हेतु अपने परिसर के इस्तेमाल की सहर्ष अनुमति दी. इंटरनेट सेवा प्रदाता सिफी ने मुफ़्त इंटरनेट की सुविधा प्रदान की. व्यापारिक संस्थाओं तथा चिट्ठाकारों से चंदा और अनुदान प्राप्त हुए. यह ब्लॉग कैम्प दो भिन्न स्तरों पर हुआ. एक तो वर्तमान चिट्ठाकारों के लिए था जहाँ चर्चाएँ असम्मेलन (unconference) शैली में होती रहीं.

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ऐसे कैम्पों की सफलता का पैमाना होते हैं – उनके प्रतिभागी. इस मायने में यह ब्लॉग कैम्प भी पूर्णतः सफल रहा. प्रतिभागियों में से बहुतों ने कैम्प में ही जीमेल खाता प्रारंभ करने के तत्काल बाद अपना तमिल चिट्ठा प्रारंभ किया. बहुतों ने तो इंटरनेट पर तमिल को पहली बार सुखद अनुभूति से देखा. एक सत्तर वर्षीय दंपत्ति सभी के आकर्षण के केंद्र बने रहे. सेवानिवृत्त शिक्षक श्री नल्लापेरुमल ने इच्छा जताई कि वे चिट्ठा में शिक्षा जगत् के अपने अनुभवों को लिखना चाहेंगे. कुछ विकलांग प्रतिभागियों ने भी समारोह में हिस्सा लिया और कुछ दृष्टिबाधित प्रतिभागियों ने चिट्ठों के आकार प्रकार के बारे में जानना चाहा. उन्हें ऑडियो पॉडकास्ट के बारे में बताया गया. इन प्रतिभागियों ने अपने फोन नंबर लिए दिए ताकि उन्हें चिट्ठा संबंधी सहायता प्रदान किए जा सकें. प्रतिभागियों में से सिर्फ ये ही नहीं थे जिन्होंने अपने टेलिफोन नंबरों का आदान-प्रदान किया. आमतौर पर प्रत्येक प्रतिभागी को व्यक्तिगत सहायता उपलब्ध करवाई गई. आयोजकों को उम्मीद है कि 50-100 नए तमिल चिट्ठाकार इस कैम्प के जरिए बनेंगे.

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किसी भी और चीज से ज्यादा, इस ब्लॉग-कैम्प ने एक बड़े उत्प्रेरक का कार्य किया है और तमाम विश्व के तमिल चिट्ठाकार अपने अपने शहरों में अपने साथी चिट्ठाकारों से चर्चारत हैं कुछ इसी किस्म के आयोजनों के लिए. चेन्नई के बाहर के लगभग सभी चिट्ठाकारों ने जिन्होंने इस समारोह में हिस्सा लिया, वे अपने शहरों में ऐसे ही ब्लॉग-कैम्प आयोजन के लिए खासे उत्सुक नजर आए. अगले ब्लॉग कैम्प की घोषणा सुनने के लिए तमिल चिट्ठा संसार बेसब्र है.

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कुछ स्मारक प्रतीकों के साथ ही तमिल में लिखने के आवश्यक अनुप्रयोगों के सॉफ्टवेयर सीडी प्रतिभागियों को प्रदान किए गए. दिलचस्प बात ये रही कि नाश्ते व दोपहर के भोजन युक्त इस कैम्प के लिए प्रतिभागियों से कोई प्रवेश शुल्क नहीं लिया गया.

इस प्रविष्टि को लिखने के लिए निम्न चिट्ठा प्रविष्टियों से संदर्भ लिए गए:

1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12, 13, 14, 15.

4 टिप्पणियाँ

  • इतने लोग एक साथ चिट्ठाकार सम्मेलन शामिल हुए इसके लिए उन सभी को बधाई और आपको धन्यवाद जो आपने ये जानकारी हम लोगों तक पहुँचाई।

     
  • हिन्दी ब्लागरों का भी इसी तरह एक सम्मेलन होगा इसी आशा के साथ.

     
  • तमिल भाषी लोगों से हिन्दी वालों को बहुत कुछ सीखने के लिये है। हिन्दी चिट्ठाकारी की प्रगति वर्तमान प्रगति से बहुत अधिक तेज हो सकती है यदि हम सबमें वही इच्छा-शक्ति और योजना-क्षमता हो जो उनमें है।

     
  • बहुत सार्थक प्रयास। हिन्दी चिट्ठाकारों को भी इस प्रकार के आयोजन करने चाहिए।